कर्नल सुरेश विश्वास | Kernal Suresh Vishwas
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
31 MB
कुल पष्ठ :
98
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नाथपुरका विश्वास वंदा ।बरावर धेय्यपूवक ठड़ते रहे । यह कुछ कम गौरवकी बात न थी किउन्होंने परोपकार और धर्मके लिये ऐसी आश्चर्यजनक बातें कर दिखाई ।
अन्तमें उनके प्रयत्नसे उस परगनेंमें नीठवाठोंके अत्याचार बन्द हो गये ।
इसमे सन्देह नह कि मलेरियाने वहँके निवासियोंका नाश करदिया हे । तथापि शान्तिपुर ओर किसनगंजके ग्वाढा जातिके लोग छादीचलानेमें अब भी बहुत प्रसिद्ध हैं । इसका परिचय भी उन्होंने कई बार
दिया है । वहाँके * वोदे * ओर “ विशे” नामक डाकुओंके किस्से अबभमी मशहूर हँ । नदियाके याद्धाआमस रामदास बाबुका नाम भा बहतप्रसिद्ध हैं । इनके शारीरिक बठका कुछ ठिकाना न था । अपने समयके
ये भीम ही थे। नदिया तथा वहाँके निवासी इस प्रकार सर्वगुण-सम्पन्न रहे है२-नाथपुरका विश्वास वंझ ।ना नदिया परगनेका एक छोटासा गोव है । यह इच्छामती
नदी पर बसा हुआ है, ओर किशनगंजसे केवठ १४ मीठकीदूरी पर है । पुराने समयमे यह नदियाके महाराजोकी राजधानी था
ओर अवं भी परगनेका एक मुख्य स्थान हे । यह कोई बड़ा ओर प्रसिद्धगौव नह है, तथापि नाथपुरके कुछीन विश्वास घरानेके आदमी यहाँ पर
सदेवसे रहते आये हैं, और अपना गौरव पहलेहीकी भौंति स्थिर रखतेआये हैं । उन ठोगोंकों अपने कुढीन, तथा सबका नेता, होनेकाठेरामात्र भी गवं नहीं हं, ओर वे भुठकर भी अपनी झाक्तियांको आड-
म्बरी रूपसे नहीं दिखलाना चाहते । इतना होने प्र भी उनका नामचारों ओर प्रसिद्ध है । वे बड़े ही श्ञीठवान, उदार, दानी तथा धार्मिक
सज्जन हैं । उनका यश बालूकी भीतके समान अल्पकाठस्थायी नहीं
बल्कि हिमालये समान अचल और विस्तृत है।है
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