शालोपयोगी जैन प्रश्नोत्तर भाग १ | Shalopayogi Jain Parnotar Volume-1

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Shalopayogi Jain Parnotar Volume-1 by गुलाबचंद संघाणी- Gulabchand Sanghani

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(८) भश्च उत्तरः (६) प्रश्नः उत्तरः (१०) प्रश्नः उत्तरः (११) प्रभः उत्तरः (१२) प्रः उत्तर! (१३) परशः उत्तरः (१४) परश्च उत्तरः (१५) प्रश्न उत्तर (१६) भन्न उत्तरः ( & ) शरीर में जीव किस जगह है ? सारा शरीर में ( सर्वाग में ) व्याप्त है. किस मिसाल. जैसे तिल में तेल. जीव मरता हैं या नहीं ? जीव कभी मरता नहीं हैं, जव मरना मायने क्या? शरीर में से जीव का चला जाना या जीव व काया का एक दूसरे से झलग होना. जीव शरीर को छोड के कहां जाता है ? दूसरा शरीर को प्राप्त करता हें. सब जीवों को दूसरे शरीर में उत्पन्न होना पड़ता हैं ? जो जीव सिद्ध होते हैं वे उत्पन्न होते नहीं हैं. जीव लोक में ज्यादे हैं या अलोक में ? लोक में जीव अनंत हैं अलोक में सिफ आकाश दी द्रव्य है वदां जीव नदीं है, लोक में रेवा कोई स्थन हैं कि जहां कोई जीव नहीं है ? सुई के अग्रभाग जितनी जगड भी, इस लोक में ऐसी नहीं है कि जिसमें जीव न हो, जीव का दूसरा नाम क्या 1 झत्मा, ७, दूसरे शरीर में (१७) 'प्र्न। ' डाथी का आत्मा बड़ा है या चींटी का ?




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