लाला हरदयाल के स्वाधीन विचार | Lala Hardayal Ke Swadhin Vichar

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Book Image : लाला हरदयाल के स्वाधीन विचार  - Lala Hardayal Ke Swadhin Vichar
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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लाला दरद्याल 3 धश्मनेकों अत्यन्त मह्वपूरण लेख छपे हैं । परन्तु हमारे दुर्भाग्य से वे अप्राप्य हैं । यदि उनके साथ उनका कोई सेक्रेटरी होता, तो उन लेखों की सं्रह आज भारत की निधि होतासन्‌ १९०८ में उनके लेख पंजाब के उदू' समाचार पत्रों में ग्राथः निकले थे । उनमें से अधिकतर पंजाब के भरसिद्ध शायर और क्रान्तिकारी नाला लालचन्दं फलक मे अपनी बन्देमातरम्‌ बुक एजेन्सी” से पुस्तकाकार छाप दिये थे । जो लेख पुस्तकाकार में छपे थे थे थे थे ।--१ कोमी तालोम, २ कौमें किस तरह जिन्दा रहती हैं, ३ सरकारी मुलाजिमत, ४ मज़ामीन दरदयाल |इनके झलावा भी अनेके लेख निकले थे । परन्तु बे कहीं एकत्रित होकर नहीं छपे । उनके कुछ उर्दू के लेख कानपुर के “कृष्ण में छुपे थे । अँग्रेजी में उनके लेख श्री रासानन्द्‌ चटर्जी के मासिकपन्र 'माड़ने रिव्यू” में दी अधिकतर निकलते थे + कुलं लख 'बैद्क मेगज़ीस' में भी सिकले थे । साल! हरदूयाल के कुछ अँग्र जी लेखों का संप्रह काशी से एएप00टू8 0६ 1,818. ्मचन्छथय के नाम से प्रकाशित हुआ था | लालाजी के ९ लेखो का अजुबाद्‌ करके इन पियो के लेखक ने “लाला हर- दयाल कै स्वाधीन विचार नामक एक १०० प्रष्ठ की छोटी सी पुस्तक प्रकाशित की थी । हिन्दी में लाला ्रदयाल के विचारों की यह पहली ही पुस्तक थी | इस पुस्तक की भूमिका स्वर्गीय गणेश शंकर जी विद्यार्थी ने लिखी श्री । इस पुस्तक का दूसरा संस्करण सन्‌ १९९९ में प्रकाशित किया गयां भौर इसमे १५ लेखी का अनुबाद करके पष्ठ संख्या ९००० ऊपर कर दी गई थी | दरद्याल जी के कुछ लेखं लाला लाजपत राय जी के 9601८ नामक साप्ताहिक प्रत्र में भी निकते थे । ये




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