श्रीगौरांग महाप्रभु | Shrigaurang Mahaprabhu

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Shrigaurang Mahaprabhu by शिवनन्दन सहाय - Shivnandan Sahaya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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परिच्छेद | भेदिवा ४ म नामननानम दसी दश शतक के श्रस्त में श्रादिसूर (वोरलेव) नामक (१) 'चस्ट्रबंशीय राजा ने कर्नाटक देश से श्राऊर बंगाल के पूर्वोश में झपना राज्य संस्थाएित किया । इसी घंश के पक राजा ने १०६३ हैं० मैं पुराने नवद्वीप को भागीरथी को उपयोगिता के विचार से (२) श्रपनी राजघाती बनायी । श्राइन अकप्ररी से जाना जाता है कि बल्लालें: सेव के पुत्र लकमण सेन के समय यह स्थान बंगान की राजधानी था । दर्लाल सेन का भी इससे श्रनइय सस्यत्ध था । वर्तमान नवदीप के ठीक सामने नदी के पठ तट पर बामुनपूकर प्राम में एक सदा श्र पद्लाल दिष्धी नामक एक तालाब उसके नाम षा 'प्रव भी स्मरण कराते हैं । पुरातन नवद्ीप का एकोश भ्रव इसी बामुनपूफर में सम्मि- लित है शार शेपांश भागीरथी के गभ में चला गया है। श्रर्पात वर्तमान नवद्वीप पुराना नदियां नहीं है। वह ते नदी फ पूर्वै तद पर झव स्थित था शर वर्तमान नवद्वीप उस समय कुतिया, के नाम से ख्यात था । . -झाघुतिक नदियां कलकत्ता से ७४ मील उत्तर है। वा 1 ' (१) “इन्डे एरियन” नामक पुस्तक के भाग २ में डाकर राजेद्ध लाल मित्रने “पाल चोर रैश शीषक प्रवन्ध में जे। सेन चंशीय राजामों की नामावल़ी दी है उसमें सच प्रथप नाम परादि न देकर “'बीरसेन” दिया है भर कहा है कि सूर धे तीर का ताप्य एकी ने से ये नामास्तर सह हैं । पर न अने “नदिया गणेटियर” सेनबंश-संस्थापक का नाम मनत सैन कैसे लिखना है । सेनय राज्य का संस्थापक ता दानावस्था से ही “भादितूर” को नानते भ्ये हैं । बार उक्त तालिका में धुमंत्र को वीरसेन ( भारिसूर ) का पुव लिखा है थार कह है कि इसके एवं इसके पुत्र हेमंत्र के वरे में के।हे विशेष जानने येग्य बात नही १। शराः नेषि उते राभ-संस्थापक ही वताता है। 'भरश्वाय्य ! (र] इन्हींने भ्रादि्तर के वुलाये हुगे पांच तौनिमे ब्राहमणो शरीर काप्यो क वंशम में कुचीनता की प्रथा स्थापित कर वंगदेशीय भादिम प्रहरणो के चग उनके विगाहादि सम की मनाही कर दी थीं विधा, दा, पमं, सदाचार तीथाटनः पूथनादि इतीनता के मुख्य चतय षै।




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