जैन धर्म का प्राचीन इतिहास प्रथम भाग | Jain Dharam Ka Pracheen Itihas Part - I

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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८पार्वंनाथ के माता पिता, चंदा प्रौर जन्मतिधिभगवान का जन्म कल्याणक पाइवंनाथ श्रोर महीपाल तपस्वी पा्इ्वकुमार का विवाह ? पार्वनाथ का वैराग्य श्रौर दोक्षा सम्बर द्वारा पाइवंनाथ के ऊपर उपरार्ग केवलज्ञान कत्याणकभगवान का चतुविध संघनिर्वाण कल्याणकपाश्वेनाथ श्रौर्‌ संवर के भवान्तर्‌ यक्ष-य क्षिणीभगवान पाइवंनाथ का लोफव्यापी प्रभाव ३५८--३६१भेगव्रान महावीरपाड्वेनाय की जन्म नगरी--काशौ पार्वेनाय कौ निर्वाण-भूमि सम्मद शिखरसर्प्ताव तित्तम परिच्छेद२३६५-- ४०६पूर्व भवगभं कल्याणकजन्म कल्याणकं जन्म-नगरी- वैशालीमहावीर के माता-पितावश शौर गोत्रनामकरणचाल-लीलाएँचिरकुमार महावीरकुमारामात्य श्रौर महाबीर. जीवन्त स्वामी की प्रतिमावैराग्य श्रौर दीक्षा रुद्रकृत उपसर्भभगवान महावीर के फल्पाणफ स्थाननन्दनेन कं उद्धार नुलमन्ान्‌ कतपाणनः गणधर का समामम पर्म-नमनप्रयने ननगयान पे गणभर भगवान फा पप-मंष मेगमान कौ द्िव्यन्यनि तत्कालीन राज्य यगे पर भगयान कस प्रसाय णियक चि्यसार येलाना फा राजनपुरियार गिदाउदायन शगानोफ स्थर जीपन्परकुपारश्रन्य नरेघमणमहावीर का लोकब्यापी प्रभाव महाचीर के समकालीन सेथधिक पूर्णखादमपमंखलि गोशालकश्रजितकेश वम्वंलप्रकुद्ध कात्यायनसंजय वेल ट्रिपुन्नगौतम चुद्धभगवान महावीर का परिनिर्वाण भगवान महावीर कैः यक्ष-यक्षिणी४०६--४१० जन्म कत्याणक स्थानदीक्षा कल्याणकं स्थानकेवलज्ञान कल्याणक स्थाननिर्वाण कल्याणक स्थान




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