देशी राज्य | Deshi Rajya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ग्वालियर वाथ नगर के पास भीतरी चढ्ानों मं प्रस्तर भ्रंश बहुत है | जलवायु--ग्वाजियर के ऊंचे पठार की जलवायु नगरमों में अधिक गरम और न सरदी में अधिक ठंड रहती है। लेकिन मेदान गरमी में बहुत गरम हो जाता हैं | मैदान में सरदी के दिनों में ठंड भी खूब पड़ती है। पठार में वापिक वपो ३० इंच शौर मैदानमे ४० इंच होती है | वनस्पति - ग्वालियर के उत्तरी भाग में एस पड़ शरीर भाड़ियां है जिनमें गरमी के दिनों में पत्ते भऋइ़ जाते हैं । तभी उनमें फूल श्ाते हैं । कहीं कहीं चाँस _ भी मिलता है । घुर दक्षिण में विन्म्याचल और सत । पड़ा पर मध्य भारत के आदश बन हैं । पल्ल ग्वालियर के बनों में विशेष कर उत्तरी भाग में चोता, तंदुआ्ा, साँभर, चीतल, हिरण, मादू » और दूसरे जंगली जानवर बहुत हैं । / '. क्षि-मालवा प्रदेश की काली माटों या माड _ बड़ी उपजाऊ है । यहाँ कपास आर दूसरी फसलें बड़ी ग्वालियर राज्य -पन्द्रहवीं शताब्दी का हिं ९५५ अच्छी दोती हैं । यहाँ के किसान भी बडे महननी हैं । नावर, शिवपुर और इसागढ़ में जमीन अधिक उपजाऊ नहीं है । अमभोरा का पूरग जिला पहाड़ी है। इसमें लगभग २६ फीमद्री जमीन खती के काम आती है। ६८ फीसदी जमीन खेती के योग्य तो है लेकिन इस समय उसमें खेतों नहीं होती है । शेष ऊसर, पत्थर और जज्जल से घिरी है । उवार (१८७४ वर्गेमी ले? वाजगा ( ३४६) मकड्‌ ( ६५८ ) अरहर ( १०५ ) कपास (२०५ ) खरीफ को प्रयान. फसलें हैं । चना (९५२) बगमील अलसी ( १४३ ) पोम्त( ६५ ) मॉहूँ (४६७) जौ ( ११९) रबी की प्रधान फ़सलें हैं । लीं मिट्टी को सीचन की जरूरत पड़ती है । इस्व रोर पार को फसल विना सिचाईइ कं नही हा सकती दे । लकरिनि कुं खोदने में बहत शवचं हाता दै । इम- लिय इस समय वेन पांच फौ मदी खेत सीच जाते हैं । खनिज-ग्वालियर राय्य को बिजावर चद्टानों में अच्छा लोहा पाया जाता है । पहले पनियार के पास




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