समकालीण राजस्थानी कहाणियाँ | Samkalin Rajasthani Kahaniya
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
126
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)म्हें आप सूं बड़ी हू
माघव नागदा
आनदे पंदरा दिनां रै टूर मु आज घरें आयो । दीला वीं बाली हनी । आनंद
पान-मतवार बर्थ लाग्यो ।
“बा राशीजी मुद्दों बीगर सुजाय राग्यों है? '
शकण योषे मापण ?' गीता भमान्याकारी भर गार पृताया।
सपूनुनस्हासू अं ही बॉ गुरवाएी होयगी ?'
ष्टम दिन री बंपर गया वर आया बंप पहंदाड़ा सू । ददीर होपा पूदे
बहने तो भूस एज जादों । अर टच सब सी आें ।'
'दिचिरी हो बाई देख रह सुद ई आदादों आनंद शोर दी न्याम
भाष्या भानो भर पलाश जड सये हदेटिदा मे भर कपो)
वापा आपदा... पापा आयस्या..... राटून बमरा में बहते गे सुधाई।
भीन हप्वहादनर दर एिटकपो । झानद यू दरेगट स्यो दायं निरास होपर्यी । पर
बो पद ए रा््रस में पोडी से उदाय सीधो ।
भाप्ये मिस्टर राट्रप उप प्ाइदेट जागूस उप बह ।
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नवारं नासे हमेव नंनोशी गुरदिएा ।'
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कर हो सद शुरू राई शातूम पी बह दा मे चादर दौएरी। अरसंट धिचो भू
पिदद होई लिसोद्य रा मैं इम्यद दिया ।
दायों देश, बा चौर मे दार होश आर यूरिया मे वृसा कान्द
करार सका बारी दैर्टो।
पद सपाइहा! राुर में दर बरु भरनया रे में पद रै1 टीसए बाग रा
बहार बरगो।
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