बजरंगबली हनुमान | Bajarangavali Hanuman

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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२ १४: वहां उन्हें विनम्रता, निरभिमानता, दीनता, वाणी की मनोहारिता आदि सत्त्वगुणो से विभुषित भी किया गया है) इस प्रकार भारतीय महाकाव्यों में रामायण, महाभारत के अतिरिकित पदुमपुराण, नारदपुराण, शिवपुराण, ब्रह्याण्डपुराण तथा रामचरितमानस मे हनुमान के चारु चरित्र का सुन्दर निरूपण किया गया है । जेन धमं ग्रन्थ पद्मपुराण के आधार भूमि पर किखा गया कवि ब्रह्मराय जी का 'बचजाङ्खवली हनुमान , एकं सुन्दर चरित काव्य है । इस में हनुमान दे: सम्पूर्ण विराट व्यवितत्व को ही नहीं उनकी उज्जवल वंश परम्परा और पुर्वेजों की जीवन कथा को भी विवेचित किया है। वे कुलीन वानरवंशी धीरोदात्त नायक हैं । न्याय, नीति, धर्म, दशंन के आख्याता और सुख शान्तिके प्रदाता हँ । भापका वर, पराक्रम मौर तेज आश्चर्यं मयी चटनाओं से पूणं है जौर चरित सर्वांग से ध्येय, शिक्षणीय तथा अनुकरणीय है उक्त श्रम्थ वणेनात्मकं है । कथा इसकी पौराणिक है और विभिन्‍न प्रकरणों मे विशजित है । कहीं कहीं-असम्बद्ध घटनाओं का भी वर्णन है किन्तु अनेक वस्तुओं परिस्थितियों और भावों के संक्षिप्त एवं स्वाभाविक वर्णन सहज ही सराहनीय हैं। उक्त काव्यग्रन्थ में निरूपित प्रकृत-चित्रण और वैराग्य प्रकरण बहुत सुन्दर बन पड़े हैं । भाषा ब्रज है । ग्रन्थ में यूं तो सभी रसों का सम्यक्‌ निरूपण हमा है, किन्तु वीर, शगार ओर शान्ति रस (भक्ति रस) की प्रधानता है । परम्परा के अनुसार नगर, वन, प॑तत, वाटिका ऋतु, विवाहः गृद्ध, संयोग, वियोग बादि के उक्कृष्ट वर्णन गौर हिमालय, महेन््रपुर तथा मानसरोवर आदि के मनोहारी दृश्य अत्यधिक मोहक बन पड़ ह! इसका उद्‌ श्य चतुर्वगं मे से जेन




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