दयानन्द की बुद्धि | Dayanand Ki Budhi
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
396 KB
कुल पष्ठ :
18
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)| ८ ९५ ).
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जो कस शास्त्र विरूद्ध अन्यथा लेख कराया सो कराय
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परे मूठ दूनेरप कौन नत दो सकता है, इति, यधश्री
श्वरान्ति ने यह क्वः ऊटपटाग हवया उसके दयसे
उच्तका चर दलाय सय नगेको च्चा ठहराया पीर
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किये खे पद्ताया तपूव अन्तमं यह चपवाया स्ति
जो दूसरे सतों को कि जिनमें हजारों करोड़ों रुलण्य
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अरसरस्से चेलॉंस्सी समसमर्मे उसका श्ाशय - सिर सी ना
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पष्ठ ५८८ अविद्वान. को अद्र पपिः रचऋअन्चषरि्यो को पिशणग्च मानता हं इति, आजकल नजो
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मर्यो श रंत्लसालाके पृष्ठ ९९ सें जो साय का लक्णाझ्पा है वेचा तो कोद निरल है! भयः सौर हों
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