मिलिंद प्रश्न | Milind Prashna

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Milind Prashna by भिक्षु जगदीश काश्यप - Bhikshu Jagdish Kashyap

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय पृष्ठ प्रहाण के लिये उद्योग १०९ ३ ३े--ब्रह्मलोक यहाँ से कितनी दूर हू १०४ ३४--मर कर दूसरी जगह उत्पन्न होने के लिए समय की आवद्य्यकता नहीं १०४ ३५--बोष्यज् के विषय में १०६ ३६--पाप और पुण्य के विषय में १०६ ३७--जाने और अनजाने पाप करना १०७ ३८--इसी दारीर से देवलोकों में जाना . . १०७ ३९--लम्बी हृड्डियाँ १०८ ४०--आस्वास-प्रस्वास का निरोध १०८ ४ १--समुद्र क्यों नाम पड़ा ? १०९ ४२-सारे समुद्र का नमकीन होना १०९ ४३--सुक्ष्म धर्म ९ १०५९ ४४--विज्ञान प्रज्ञा और जीव ११० चौथा वर्ग समाप्त मिलिन्द राजा के प्रदनों का उत्तर देना समाप्त चौथा ९९४-४०३ मेण्डक प्रदन क. सहावरगं १--मेण्डक--आरम्भ कथा ११४ क धामिक मन्त्रणा करने के अयोग्य ८ स्थान ११६ ख धामिक विषयों पर मन्त्रणा करने के अयोग्य आठ व्यक्ति बह 2 ११७




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