व्याख्यानदिवाकर : | Vyakhyandiwakar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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=+ (ग) न न न ५ ० ० ५ + += ~~ पट पा ले , साधारण जन सुदाय दत नाशकारी प्रान्दोलन से घवरा | गयां श्रीर श्रपनी श्वपनी जाति मे एस श्रान्दोलन फो मिन | के लिये उपाय सोचने लगा तथ-नक़ धर्मचीर श्रग्रवाल मार- | वाड वैश्यौ ने श्रप्रवाल पंचायत का उद्घादन कर विधवा | विवाह को रोकने की ठान दी। इसी श्रवसर पर भिन्न भिन्न स्थानौ से हमारे नाम करई | सदस पत्र श्म श्राश्य के श्रये कि श्राप विधवा विच फे | विवेचन पर श्रपनी लेष्रनी से कोई वृग्रन्ध लिखे. प्न की | श्राधिक्यता को देख कर हम भी धधरागये प्रस्त मे इस विपय | का विवेचन करने छा चिचार्‌ कर सिया । . तैयारी के लिये हमने स्वर्गीय ईश्वरचन्द बिद्यासागर | निर्मित 'चिधवाविचाहएवं वद्रीद््त ज्ञोशीकृत 'विधबोंद्दाद- | मीर्मालार तथ गंगाप्रसाद्‌ उपाध्याय संकलित श्रिधवा विवाद [ मीस, श्रौर गोखामी राधाचरण किद्ित विधवा विचा विवरण” इसी प्रकार स्वर्गीय लाला नानकचन्द भूतपूर्वं | मेनेस्टर इन्दोर संपादित 'विधवातिवाह' प्रभूति संत्रदद पुस्तकें देखीं; इन पुस्तकों के लेखकों में से चाज बाजकों तो हिन्दी भी लिखना नहीं श्राता तो सी वेद के घिवेचन पर ट पडे | | विद्यासागर. उपाध्याय, जोशीजी प्रभूति लेखक तरनी के | विद्वान्‌ होने पर मौ भति स्मृति केक्षान से म्य हैं | श्राप | लाग योंरुपीय श्राचरण के भूत से जकड़े गये हैं उसी से देश | का झरभ्युस्यान मान बैठे हैं इस हेतु से श्राप लोगों को विधवा




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