भारत का भाग्य | Bharat Ka Bhagya

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Bharat Ka Bhagya by केशवप्रसाद खन्नी - keshavprasad khanni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हिन्दुस्तान . श्र के लिए दिन्दू श्रफ़सरों को श्रपनाया तथा दिन्दू टुकढ़ियों को. पनी सेना में रखा था । इसके उत्तर मं विजयनगर के हिन्दू राजा मुसलमान टकड़ियों को सेना में रखते थे और उनके नमाज़ के लिए मस्जिदे भी चनवाते ये] वे मुखलमान सौदागसें को भी प्रोत्साहन देते थे । उसी शताब्दी के श्न्तिमि भाग में कैम्बेमं चन्द दन्द गुडं ने मुखलमान सौदागरों के एक दल पर हमला किया श्रौर एक मह्जिद को क्षति पहुँचाई 4 सिद्धराज ( १०६४-११४३ ) ने इस दःखद मामले की खुज्ी जाँच करवाई और ्रपराधियों को कदी सज्ञा टी । उसने एक नई मस्जिद्‌ बनवाने के लिए काफ़ी घन भी दिया ।* इसका स्वाभाविक परिणाम यह इुद्रा कि एसी घटनाएँ फिर न हुई । हम हैरान हैं कि 'हिन्दू सदासभा? श्रीर 'सुल्लिम- लीग” के तीत्र श्र द्रुत वक्ताश्रों को भारतीय “इतिहास की इन घटनाओं का परिचय है या नहदीं | इसीलिए, किसी भी राजनीतिक वक्ता के लिए--- चाहे वह साम्प्रदायिक संस्था का श्रथ्यक्ष हो, मारत-सचिव हो या. वायसराय अथवा गवर्नर--गदरा ऐतिहासिक शान अनिवाय है | जिस तरह दक्षिण भारत के हिन्दू श्रौर सिंदल द्वीप के वौंद्ध राजाश्ं ने, मुसलमानों के प्रति एक श्रघिक प्रगतिशील श्रौर सहिष्णु नीति का वलम्बन क्रिया, उसी प्रकार सुसलमान भी अपनी दिन्दू शासकों. राजनिष्टा और सौजन्य से. विश्वासपात्र त्रने और शीतर को मुश्निम दी सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में उन्होंने उच्च- सेना पदों को भी प्राप्त किया । उनके नेठ। : हिन्दू राज्यों में मंत्री, सेनाध्यक्ष, जल-सेनापति, राजदूत आदि बने । उनमें कई तो हिन्दू राजानो की अधीनता श्रौर संरक्तण। में रजवाड़े भी बने । | सार्कोपोलो के यात्रा-विवरण में हमें एक तक्नीउदीन नामक राजा सुन्दर पंड्या के सलाइकार श्र उपमसंत्री का वर्णन मिलता है । अंग्रेजी कवि १ हक्ियट : हिस्ट्री श्रव इंडिया, भाग २, पृष्ट १६४




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