आलोचना इतिहास तथा सिद्धान्त | Alochana Itihas Tatha Sidhant

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Alochana Itihas Tatha Sidhant by श्री डी. पी. खत्री - Shri D. P. Khatri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-सुची प्रथम खण्ड : इतिहास प्रथम प्रकरण प्राचीन श्रालोचना-काल का विभाजन --प्रुनानियों की श्रालोखनात्तक प्रतिमा-- यूनानी साहित्यिक श्रादशे--यूनानी आआदर्शों का हास--रोमीय साहित्य-सुजन की प्ररेणा--प्राचीन युग का महत्त्व ३-१० द्वितीय प्रकरण श्रालोचना का आदिकाल--काब्य में प्रेरणा का महत्त--कंवि धर्म तथा काव्यादर्श --प्रतीकवादी श्रालोचना-रैली का जन्म--कला-तत्वो का श्रनुसन्धान--कला तथा प्रेरणा का महत्त्--व्यंजना का महत्त--काव्य की झन्तरात्मा का माषण-शास्त्र का श्रध्ययन तथा गद्य की रूप-रेखा--निणुंयात्मक श्रालोचना-प्रणाली का जन्म श्रौर विकास ११-२४ तृतीय प्रकरण १: त्रफलातू काव्य श्रौर कवि का मूल्याकन--साहित्य श्रीर समाज--निकृष्ट कलाकारों का बहि- ष्कार--कला का वर्गीकरण तथा मूल तच्व--काव्य का वर्गीकरण तथा श्रन्य तत्व --नाटक के तत्त्व - सुखान्तकी के मूल तत्त--भाषण-शास्न तथा गय-शैली का विश्लेषणु--्रालोचना सिद्धान्त समीक्षा २५-३६ : २: अरस्तू श्रालोचना-शैली -गीतकाव्य का विश्लेष्ण--काव्य का मूल खोत--क्रियात्मक झलोचना-शैली का जन्म -शझनुकरण-सिद्धान्त का विवेचन - काव्यादश का विवेचन काव्य तथा छन्द--दुः्खान्तकी का वेशञानिक विवेचन ; “भय? तथा कर्णा” का - संचार--दुः्खान्तकी के शझन्य तत्व: कार्य, वस्तु तर कार्य--'वस्तु”-क्रम, तक, ७




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