महावीर वाणी | Mahaveer Vani

Mahaveer Vani by श्रीचन्द्र रामपुरिया - Shreechandr Rampuriya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-सूची १ अनुत्तर मगल १-७... ५ू धर्म ४१-४५ १ नमोकक्‍्कारों १ १ दस धर्म ४१ २ चत्वारि मगल १ २ धर्म-स्थित ४३ ३ पंच परमेष्ठी स्वरूप २ ३ आत्मार्थ परार्थ ४४ ४ पच परमेष्ठी भक्ति २ ६ कामभोग ४६-५३ २. उपदेश प.-१६ १ काममोग ४६ १ मा पमायए ध २. मृगतृष्णा ४६ २ असंस्कृतम्‌ १० ७ विनय पु्-पुदु ३ रत्नत्रय का आदर करो... १२ १ विनय . मानसिक वाचिक ४ धर्म ही त्राण है १४ कायिक पूष्ठ ३ आत्मा बध और मोक्ष. १७-२६ २ विनय के पाँच भेद पुपू १ आत्मा १७ ३ विनय धर्म का मूल पु २ आत्मत्रय कद ४ विनीत-अविनीत पद ३ बहिरात्मा २० ८ शील ६०-६३ ४ स्वद्रव्य परद्रव्य २१ १ शील बनाम ज्ञान ६० पू बघ और मोक्ष २२ २ शील-महिमा ६१ ६ बंधन और आत्मबोघ २पू ३ कुछ शील ६३ ७ आत्म-जय . परम जय... २६ ४ दुशील की गति घ४ ८ आत्मा रक्षित और ६ भाषा-विवेक ६५-६६ अरक्षित २७... १० अनुस्रोत-प्रतिस्रोत ६७-६८ ६ आराध्य और शरण ११. विजय-पथ ६६-८४ आत्मा ही २६ १ रहस्य-भेद ६६ ४ दुर्तभ संयोग ३०-४० २. तृष्णा-विजय ७१ १ परम अग ३० ३ काम-विजय ७३ २ ज्ञान और क्रिया ३२ ४ मन-विजय ७४ ३ सयम और तप ३४ प्‌ इन्द्रिव-विजय 9६ ४. त्रिरत्न ३७ ६ कपषाय-विजय ८ ५ समायोग ३८ ७ इन्द्रिय-कषाय-विजय पड़े




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