गान्ध्ययन | Gandhyayan
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
112
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पूजा-गीतवंदना के इन स्वरो मेँ एक स्वर मेरा मिका लो।
राग में जब भत्त झूलो
तो कभी माँ को न भूलो,अर्चना के रत्नकण में एक कण मेरा मिला लो।
जब हृदय का तार बोले,
शृंखला के बंद खोले;हों जर्हा वलि शीश अगणित, एक शिर मेरा मिला खो।१३ २: गान्ण्ययन `
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