सच्ची शिक्षा | Sachchi Shiksha
श्रेणी : शिक्षा / Education

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लेखक :
मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi ),
रामनारायण चौधरी - Ramanarayan Chaudhari
रामनारायण चौधरी - Ramanarayan Chaudhari
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
21 MB
कुल पष्ठ :
374
श्रेणी :
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लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )
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रामनारायण चौधरी - Ramanarayan Chaudhari
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)तीसरा काल
२२. सोलहसे पच्चीस वर्षके समयको मैं तीसरा काल मानता हैँ ।
अुस कालमें प्रत्येक युवक और युवतीको अुसकी अच्छा और स्थितिके
अनुसार शिक्षा मिले ।
२३. नौ वषके बाद आरंभ होनेवाली शिक्षा स्वावलम्बी होनी
चाहिये । यानी विगद्यार्थी पढ़ते हुओ असे अद्योगोंमें लगे रहे, जिनकी
आमदनीसे शाखाका खच चरे ।
२४. शालामें आमदनी तो पहलेसे ही होने लगे । किन्तु श्रुरूके
वषौम खच परा होने कायक आमदनी नहीं होगी ।
२५. शिक्षकोंको बड़ी-बड़ी तनखाहँ नहीं मिल सकतीं, किन्तु वे
जीविका चलाने लायक तो होनी ही चाहियें । शिक्षकमें सेवाभावना
होनी चाहिये । प्राथमिक शिक्षाके लिओे कैसे भी शिक्षकसे काम चलानेका
হিনাজ निन्दनीय है । सभी शिक्षक चरित्रवान होने चाहियें ।
२६. शिक्षाके लिभे बड़ी ओर खर्चीली अमारतोंकी जरूरत
नहीं है ।
२७. भप्रेजीका अभ्यास भाषाके स्मे ही हो सकता है और
यसे पाग्ककममे जगह भिलनी चाहिये । जैसे हिन्दी राष्ट्रभाषा है,
वैसे ही अंग्रेजीका अपयोग दूसरे राष्ट्रोक साथके व्यवहार और ब्यापारके
जिमि ই । |
न नै मै
खी-शिक्षा `
२८. ल्लियोंकी विशेष शिक्षा केसी ओर कहौँसे शुरू हो, जिस
विषयमे मैने सोचा भौर लिखा है, तो भी अिस बारेमें किसी निश्चय
पर नहीं पहुँच सका हूँ । यह मेरा दृढ़ मत है कि जितनी सुविधा
पुरुषको मिलती है, झआुतनी स्लीको सी मिलनी चाहिये । ओर विशेष
सुविधाकी ज़रूरत हो, वहाँ विशेष सुविधा भी मिलनी चाहिये ।
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