शुक्रनीति | shukraniti

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shukraniti by खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शुक्रनीतिकिविषयानुक्रमणिका । श्र पस्णणपपणण----- विषय सब आतिकों वर्ज दे ............ ९६ आतिक्रांयदिकोंसे आनिष्ट फल ९७ मध्यम प्रकारका आचरण करे ९७ देवादिकांका स्वामी ह्वोनेकी इच्छा न करें.................... ९७ इनके भजनादिककी इच्छा करे ९७ तरुणी आदिकों पराधीन न करे ९७ अल्प कारणसे वढ़े अर्थको न त्यागे९७ अधिक खचेके भयते सत्की- तिंको न त्यागे.. .....- ... ९७ दूसरा उदास ट्ो ऐसे बचनकों विनोदमेंभी न कहे............ ९७ कठार वचनसे मित्रभी शन्चु होता है ९८ स्ववछाधिक झायुको कांपेपरभी लेखक .-दननदनमसममम कस शुढ मनुप्यकों सोजन्य भूषण है... ९८ अश्वादिकोंमें वेगादिक भूषण है ९८ इनके विपरीत दुर्भूपण हैं........ श्ढ एकट्दी नायक दहोयतो शोभा है ९८ डिलिकी उपेक्षा न करें............ ९८ पेछुन्यादिक दोष गुणियेकिंगी शु- णॉंका छादन करते हैं........ ९८ बाल्यादिक अवस्थामें मात्रादि- कॉका नाश यह महापाप- फल _ फल द..........०५-पम्स रद अनिधप्राप्तिकारण ................ ९८ नररूपघारी पशुका लक्षण........ ९९ ख़छका लक्षण.....८..८८ ८.०. ८ - . ९९ आशाबद्धकों जगतभी पर्याप्त- सदी - दे-ननन्तरटरस्पसलसशसर ९९ चूतेपुरुषका कम -.....८ ८० ० ०+ श्र भीतिकारक पुत्रका लक्षण... ९९ आीतिदा ख्रीका लक्षण ...... .८ ९९ प्रीतिदा और दुःखदा माताका छंक्षण... 0३७० ०9७०७क७कककककककककरीय ट्रु पृष्ठ ९ ० श्३्‌ भटे २४ गण ्द १९ २९ रे१ ड्श्‌ ३४ रद ड्9 देर ० ः ४१ थेड़े विषय पृष्ठ. शलो० प्रीतिकृत्पिताका लक्षण ........ २१००. 9४ मित्रका लक्षण मना १००. 2५ दारिद्यका कारण. ........ .... १००. ४६ दुःखकें कारण ...०८ ..८. .... १००. ४८ ख्रियोंकी यथेष्ट कामना न करे वह सुखभागी नहीं होता १००. ५० ख्री वश हनिका उपाय .... १००. १ मपुरमायू आदिक निजेनत्वा- दिककी इच्छा करते हैं .... १०१ ५ मूखमनुष्यका कृत्य .......... . १०१. ५९ सत्वगुणाधिक श्रेष्ठ हैं ........ १०१. ६० न्राह्मण अपने कर्मसे सबसे अ- घिक होता हें . ० १०१. ६१ स्वघमेस्थ ब्राह्महकों देखकर क्षत्रियादिक डरते हैं........ १०१. ६९ निपमें धर्मद्दनि न दो बडी बृति श्रेष्ठ है ................ १०१. ६३. सबसे कृषिवृत्ति उत्तम है.... १०२. ९४ यात्रा अधमतर वृत्ति है.... १०९. दृण क्तचित्‌ सेवाभी उत्तम बृत्ति है १०२. दण अध्वयैवादिकोंसि मद्दाधनी सही डाता-....न नर १०५ ६६ राजसेवाकें बिना िपुल धन नद्दीं ट्वोता दि नस्ममसररर १०२ दुख राजसतिवा अतिकठिन है........ १०९ ६८ दूरस्थभी समीप है ..-.... .. १०२. ७० हिले निर्धनत्व होना -....... १०३. ७२ पट्टिंढे पादगमन सुखदायी हूं १०२. ७३ सतापत्यत्वसे अनपत्यत्व श्रेष्ठ फलनारपनस्यसलगपमनयुसमकस्केथयमथककर श०भ्‌ 585 अल्पज्ञतासे मूखंता अच्छी.... १०३. उण पढ़िले सुखकारी पंछि दुःख- कोरी रन रसिनस्म १०३. 3७ कुर्मत्री आदिकॉसे राजादिकोंका नाझा होता है........ .८ १०३. ७




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