मेरा समाजवाद | Mera Samajvaad

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Add Infomation AboutMohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
70
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बिना बाद का समाजवाद * १५भ० --क्या याप आधिक दबावकों हृंदय-परिवर्ततका साधनबनायेंगे ?मु०--हां, परन्तु वह अहिसक होगा।
प्र०-- अहिसक जिसी वरये न करि जाप अआनका खून नहीं
बहायेगे ?अु० --ओक वार अगर समाजवादी अहिसाकों स्व्रीकार कर
छेते है, तो ऑन्हे अहिसाके निष्णातके रूपमें मुझे स्वीकार करना ही
होगा। लेकिन मैं कानूनमें मानता हू। आुसमें दवावका तत्व होता
जरूर है, परन्तु भुसे दूर करना संभव ही नदी है।प्र० --- आप किसानों और मंजदूरोंका सगठन किस आधाद पर
करना पसन्द करेगे ? धसु -- मुनक वतमान स्थितिमें सुधार करने और भुतकी
शिकायतें दूर करनेके विचारसे अुनका संगठन होना चाहिये । में विरोध
करता हू राजनीतिक अुद्देश्योंके लिआे अतका आुपयोग करनेका |
भुदाहरणके लिओे, यह हो सकता है कि हरिजनोंके लिझे किये जाने-
वाले भेरे प्रथत्तोका यह परिणाम आये कि वे राष्ट्रीय आन्दोलनका
समर्थन करे, छेकिन जिस प्रिणामके लिझे ही मैं अुनकी ओरसे नहीं
তত रहा हूं। भित्ती तरह समाजवादियोंकों मजदूरोंका सगठत ब्रिटिश
साम्राज्यवादके खिलाफ अुनका अुपयोग करनेके खयालसे नही करना
चाहिये । यही कारण है कि बम्बऔके कपड़ा:आुद्योगके मजदूरोंकी
हडतालते मुझे खुशों नहीं होती । मे मानता” ` ^ .. हड़ताल
असे छोगों द्वारा कराओ गभो है ओर “न जे करतेকী আআ আরা आपने किये
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