पञ्चाध्यायी | Panchadhyayi

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Panchadhyayi  by पंडित मक्खनलाल जी शास्त्री - Pt MakkhanLal Ji Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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एष्ठ. पंक्ति, अशुद. १० १७ २७ १८ १९ २२ २३ ३० হও ३५ ४१ 4४ ६१ ८६ ` <६ ८७ ৫৫ ९९. १०४ १०९ ११६ १२६ १४९ १५९ १५२ १७७ १८० ११ २२ २९ २८ २७ १ २३ 1 २४ १२ २७ २२ २४ ने जावकी कम कमं मत्थर उपर दाष्टीत ग कीय अपक्षा उत्‌ अरमोनियम श्रीमद्धवान्‌ ग्राह्य मेद क्षयोमशम शरिर शारिरिक भूम्द्वान्ति २ पीताग्वादि ९ ९४ २२९ ९६ २६ १९ ९ घूआं इसकिये ज्ञकाकार अदर्शन निविकित्सा হালান সাত १९.१ २५ नदेकस्य ३१६१ २१ विधीयताम (१४) ष्टु. पंक्ति. हुड. २१२ १७ ज्ञान चतना ज्ञान चेतना २१३ १३ यावष्छुताम्यास यावच्छृताभ्यास कर्म कमो पत्थर ऊपर दाष्टीत न कायै अपेक्षा उक्त एल्यूमीनियम श्रीमदद्भगवान अग्राह्य भेद क्षयोपशम शरीर शारीरिक भूद्गांति पीतत्वादि ঘুজা হলক্গি शकाकार মহান निविचिकित्सा शासन प्रगट तदेकस्य विधीयताम्‌ २१६ २१६ २४६ २४८ २४९ २७६ २७२ २७६ ३०० ३२०२ ३०२ ३०३ ३०६ ३०३ ३०३ ३१६ ३१७ ३१७ ६३१८ ३१९ ३२० ३२२ ३९२२ ३२२३२ ३३६ अशुद. সু ৮ ९ ऐकां एकां १६ प्राति व्याप्ति १ योके योगके ३ पाबंध पाषबध १८ धरी धारी १२ मी ही ४ भी ही १७ ज्ञान अज्ञान १९ मी भी १२ मे भेद १८ समक सम्यक्‌ १८ अनमय असंयम २० संमय सेयम २२ इंद्रियों. इंद्वियोंकी २८ मयमक्रा संयमको २७ अचित्यऽखा अित्यस्वा १३ अहन्प अरहंत १८ णिवासिगो णिवासिणो २६ करता करतापना १३ सुद्र समृदद ९ दस रस २७ सीलोचय धर्म सीछोयधम्म २८ लकक्‍्खण लकखण ३० घण्णे धण्णे ११ र्ग लगा + कहीं कहीं मानानि टूटनेसे झब्दोको य्द्धं अन्तर आग्रया है। ऐसे छब्दोंको पाठक महोदय कृपा करके सुधार कर पढ़ें।




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