स्वाध्याय १ | Swadhyaya 1

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Swadhyaya 1  by नरेन्द्र भानावत - Narendra Bhanawat

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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स्वाध्याय श्रात्मवोध करा उत्स अधिक विचारने को बाध्य करने वाली पुस्तक ही ग्रधिक लाभकारी होती है। लैला-मजनू और तोता मैना की कहानियों के लिये न तो मस्तिष्क को कुछ झ्रायाम करना पडता है भौर न उनसे कुछ लाभ । इस तरह जीवन में स्वाध्याय की आदत डालने से दोनो क्षेत्रों मे लाभ मिलता है। स्वाध्यायी कहाना [ ७ कु श्रौर है ओर स्वाध्यायी वननाकरद्धं प्रौर। जौ शुद्ध हृव्य से स्वाध्यायी वनता है तथा शास्मो को हृदय से पढता है तो उस काल में उसको उस शास्त्र के रचयिता साक्षात्‌ बातें करते प्रतीत होते हैं। यह सच्ची स्वाध्याय की भूमिका है । र রি




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