महाभारत का आधुनिक हिंदी प्रबन्ध काव्यों पर प्रभाव | Mahabharat Ka Hindi Prabandh Kavyo Par Prabhav

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Mahabharat Ka Hindi Prabandh Kavyo Par Prabhav by विनय - Vinay

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about विनय - Vinay

Add Infomation AboutVinay

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
१८ नन्द, किराताजु नीयव्यायोग, नल-विलास, निर्भधमीम पांडव-चरित्र, १४ंवी वी यतीः के प्रमुख काव्य, क्रपश्र श-काव्य, हरिवंश पुराण, महापुराण, हरिवंश पुराण, पांडव पुराण, हरिवंश पुराण, हिन्दी साहित्य फा श्रादि फाल, पृथ्वीराज रामो पर महाभारत का प्रभाव, पंच पांडव रास, मविति काल मक्ति वे श्रान्दोलन पर महाभारत का प्रभाव नही, तुलसी, सूरदास, उत्तर मध्यकाल, महाभारत, संग्रामसार, पांडुचरिन, महाभारत कर्णाजु वी, नलोपाख्यान, जैमिनी पुराण, विजय मुक्तावली, पंचपांडव चौपाई, विदुर प्रजागर, नल चरित्र, १६्वी शती के प्रवन्ध काव्यों की सामान्य विशेष- ताए, श्रत्तात रचनाक्ाल के एवि श्रीर ग्रन्य, महाभारत शल्यपर्व, चत्रब्यूह, द्रोसपर्वे भाषा, धर्म संवाद, कृप्णायन, घमं गोता, पांडव यच्रन्दुचन्द्िका, नलपुराण, नल चरित्र, अभिमन्यु-कथा-अ्रभिमन्यु वव 1 चतुथं श्रव्याय महाभारत की कथा का प्रभाव १०५--२६ १ तीन प्रकार के प्रवन्ध काव्य, छृष्णायन, कथा-संग्रहण, परिवर्तन-परिवर्धंन प्रौचित्य-समीक्षा, रृष्णायण, जयभारत, कथा-संग्रहण, परिवर्तन-परिवर्धन, निष्कर्पे, महाभारत का कणुं-प्रसंग, जन्म-कथा, दो रूपान्तर, महाभारत में कर्ण-कथा, रद्ििमरथयी वस्नु-संकलन-क या-विकाम, परिवतंन समीक्षा, सेनापति कणं कथा-संकलन, परिवर्तन परिवर्धन-कथा का विकास, हिडिस्धा प्रसंग में नूतन-उद्भावना-निष्कर्ष, श्रं गराज, मुव- कथा, वस्तु संकलन,परिवर्तन-परिवर्धन-समीक्षा, महाभारत विरोधी भावना पर विचार, एकलब्य-प्रसंग, एकलव्य, कथा-संग्रहण, गुरुदक्षिणा समीक्षा, महाभारत का नलोपा- ख्यान नल नरेश, कथा संग्रहरत, परिवर्तन-परिवर्धन, नूतन उद्भावनाएं, दमयन्ती, वस्तु संकलन, परिवर्तन-समी क्षा, नकुल, कथा-संग्रहण, परिवर्तत-परिवर्धन, श्रीचित्व- समीक्षा, प्रासंगिक वृत्तों पर आधारित प्रवन्ध काव्य, जयद्रथवघ, कथा-संग्रहण, परि- वर्तन-परिवर्धन, नहुप, वस्तु संग्रहण नूतन उद्भावना, कौन्तेय कथा, कथा विकास- समीक्षा, बल्यवध, समीक्षा, हिडिम्वा का वृच्र, हिडिस्था, सेनापति कर्ण में मनोवैज्ञा- निक स्थिति, समीक्षा । । पंचम श्रव्याय महाभारत के चरित्र-चित्रण का प्रभाव २६३--३४ ६ महाभारत के चरित्र-चित्रण की विशेषताएं , वीर युगीन भावना, प्रेम का क्षेत्र , आधुनिक काव्य में चरित्र, पुनरुत्यान-युग, वर्तमान युग, पुनरुत्वान युग के प्रेरक तत्व बुद्धिवाद, आदर्णवाद, जनवाद एवं मानववाद, वर्तमान काल में चरित्र-चित्र गा, कृष्ण, नीतिज, लोक-रक्षक, परब्रह्म, धर्मराज युधिष्ठिर, श्राज्ञा पालन, दयालुता एवं क्षमा, थिप्ठाचार, साल्विकता, निस्पृह्य, ध्रनासक्ति, वीरत्व, महाभारत के प्रतिकूल चरित्र, महावली भोमसेन जौयं-बीरत्व, क्षमा, सदुभावना । मनोवैज्ञानिक विवेचन, कृष्णसखा श्रयं न, यौर्व-वीरस्व, मानमिक ट्ट, योदाख्प, मनोवैज्ञानिकता, अन्यस्ूप, प्रनिमन्यु,




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now