बना रहे बनारस | Bana Rahe Banarash

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Bana Rahe Banarash by लक्ष्मीचन्द्र जैन - Laxmichandra jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बनारस : एक হিন্ত্যাল 58 खुदा आब्ाद रखे देशके मंत्रियोकी जो गाहे-ब्रगाहे कनछेदन, मूंडन, शादी और उद्धाटनके सिलूसिलेमें बनारस चले आते है जिससे कुछ सफाई हो जाती है; नालियोमे पानी और चूनेका छिड़काव हो जाता है । निराली भूमि अगर आप कभी काशी नहीं आये है तो आपको लिखकर सारी बातें सममायी नहीं जा सकतीं। अगर आये हैं ओर इसका निराछापन नहीं देखा है तो यह आपके लिए दुर्भाग्यकी बात है। शायद आप यह सवाल करे कि आखिर बनारसमे इतना क्या निरालापन है जिसके लिए दिढोरा पीय जा रहा है, तो अजं है--- विज्ञनने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रृथ्वी शूत्यमें स्थित है और वह सूयके चारो तरफ चक्कर काय्ती है। लेकिन इस तथ्यकों भारतवासी नही मानते । उनका “विज्ञान! यह कहता है कि पृथ्वी 'शेषनागके फन' पर स्थित है और स्वयं सूर्य उसके चारो ओर चक्कर कार्ता है। हमने कभी पश्चिम, उत्तर या दक्षिणसे सूरज उगते नहीं देखा। यह सत्र विंशानकी बातें चण्टरूलानेकी गप्प है ! एक वेपेदीका लोया जघ जिना सहारेके इधर-उधर लुदकता ই तव पृथ्वी जेसी मारी गोलाकार वस्त॒ (कौल पश्चिमी विज्ञान) निना किसी लाग (सहारे) के कैसे स्थिर रह सकती है १”? बताइए, है कोई वेजशञानिक-खगोलवेत्ता जो उत्तर देनेका साहस करे ! चनारस वालोका दृढ़ विश्वास है--प्ृथ्वी शेषनागके फनपर स्थित है पर उनका बनारस भगवान शंकरके त्रिशुल्पर है। शेषनागसे उसका कोई मततत्र नहीं | इसीलिए. काशीको तीन लोकसे न्यारी कहा गथा है, यहाँ गंगा उत्तरवाहिनी है, यहाँ कभी भूकम्प नहीं आता । कभी-कभी शंकर भगवान्‌ जत्र आराम करनेके लिए त्रिशुल्पर पीठ टेक देते है तब यहॉकी जमीन कुछ हिल भर जाती है। अधिक दूर क्यो, काशी शकरके निश्‌ पर है या नही, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यहॉकी भूमिकी बनावट है ।




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