गायेन जस देखेन | Gaayen Jas Dekhen

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
129
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ठेका लइ लड़ फिरि लरिकन का सूठे नम्बर दह
বিক্ষত লহ डिर्गकी रहे ऋटि वनिं गयी मौकरी
सवे चरं भेजि आदर्थन का वमि रोटी की देखेर
हद गयेन गुनन वे बहुन दरि रहि गेन पियक्कड निर
अब रोड रहेन सम्मानु मिलइ इन मुझ देव के
हमका निद्वारि कहि रहे लोग अइसे मास्टर का नम
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तु रे भारत केर किसान
- ~. कटवाइनि सबं तोहरेंद मेन
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नैता तिकड़म ताल भेजाइनि
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