पूर्व की ओर | Purv Ki Or

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Purv Ki Or by वृंदावनलाल वर्मा - Vrindavan Lal Verma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नाटक के पात्र वीरवम्मो--घानन्‍्वकटक का राजा--उपाधि पह्लवेन्द्र । अश्वत' ग--ती खर्म्मां का भतीजा | गजम ३--अ्रश्वतुज्ञ का साथी, विदूषक | जय स्थविर--नागार्ज नी कोश्डा ( श्रीपवत ) के एक विहार का तान्त्रिक बौद्ध भिज्ञु | चन्द्रस्वामी-श्रषठी च्रौर व्यापारी, प्रतिष्ठान प्रदेश का निवासी স্সীয जलयान का स्वामी | अवन्तिसेन महानाविक-जलपोत का सन्चालक | कनः पकेतु--धान्यकटक का एक धनाव्य व्यापारी | जिध्णु--मगध का एक निर्वासित नागरिक जो नागद्गीप में रहने लगा था | धारा--जिष्णु की पुत्री । तूम्बी--नाग-छीप की स्त्री गौतमी--कन्दप केतु की पुत्री । मन्त्री, भट्टननागर, दंडनायक, नाविक, मारी; द्वारपाल, योद्धा, नागद्ठीप के निवासी, वारुण॒द्वीप के निवासी, नांगद्वीप वासिनी खियां इत्यादि । स्थान--घान्यकयक, नागाज॑नी कोडा, प्रतिष्ठान और नागद्दीप तथा वारुण द्वीप | समय- तीसरी शताच्दि के श्नन्त के लगभग |




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