भारतीय इतिहास पर टिप्पणियां | Bhartiya Itihas Par Tippaniya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मुसलमातों द्वारा भौरंते की विजय ४ * १७ कर्‌ वंच “गया धौ; इन “लोगों ने उसका साथ ' दिया; अ्सलॉर्न के ऊपर चढ़ाई कर दी, उसे हरा दिया-और॑ वहराम को गद्दी पर बैठा दिया । १११४८८१ १५२: सुलंतांन वेहराम । कुछ वर्षों के शासत के बाद,'उसते शोर के साथ छेड़खानी शुरू की, उसके एक राजकुमार को मरवां डाला; मारे गये झाहजादे'के भाई, सैफ्ुह्दीन:ने उसके” खिलाफ वग्रावत कर दी, ग़जनी पर क़ब्जा कर लिया, और बहराम को भगाकर पहाड़ों में खदेड़ं दियाँ। वहतम फिर लौट आया, सैक्ुद्दीन को उसने गिरफ्तार कर लिया और' सता-सताकर मार डाला; मारे गये व्यक्ति का एक भाई, अलाउद्दीव, गौर लोगों की फौज लेकर आगे बढ़ा; ग्ज़नी को उसने बिल्कुल बर्बाद कर ` दिया; उसे मिस्मार करके मिट्टी में मिला दिया; उसने केवल तीन इमा- रतों की-महमुंद,, मसऊदे” प्रथम, औरं इब्नाहीम के मक़बरों को-सावुत खड़ां रहने दियाँ था । बहुराम लाहौरें माय गया; ग़जनी राजवंश का अन्त हो गया। गजुनी का शाही परिवार लाहौर में ३४ वर्ष तक (११४६ तक) और राज्य केरता रहा, इसके/बाद खत्म हो गया | इस प्रकार, महमूद द्वारा अपने को (६६९६ में) सुलतान' घोषित करने के १४७ धर्ष बाद, महमूद ग़ज़नवी के राज॑बंश का अन्त हो गया । (३) ग़जूनीं में सुबुकतगीन दंशं के ध्वंसावशेषों पर गोर वंशं कौ स्थापना, ११५२-१२०६ ११५२-१ १५६. सलाउहीन 1 भर्स॑लान से भागकर सेलजुकों के पास पहुंचते पर बहराम ने उनसे वादा किया था कि अगर वे उसे उसकी गद्दी फिर दिलवा देगें तो बह उन कर (राज) देगा ओर वास्तव मेँ जव तक वह गही पर बता रहा तब तक उन्हें ख़राज देता भी रहा । अलाउद्दीन ने ज्यों हो अपने को गनी कता बादशाह घोषित किया, त्यों ही सेलजुकों के अ्रवान, संजर हे उससे माँग की कि वह पहले की ही तरह खराज दे; अलाउद्दीन ने राज देने से इस्कार कर दिया; संजर ने अपनी सेवा लेकर उस पर चढ़ाई कर दी और उसे बन्दी वना लिया; फ़िर भी, संजर ते उसे उसकी गही पर विग दिया । ११४३. ओमुज के ताता . कबोले ने संजर बौर अलाउद्दीव दोनों के राज्यों पर अधिकार कर लिया । अलाउद्दीन की पृत्यु के वाद उसका वेटा- ११५६-९१ १५७--सैकद्दीन उसका उत्तराधिकारी बना: उसे उसके एक अमीर म




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