अणुव्रत जीवन दर्शन | Anuvrat Jeevan Darshan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
284
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)त्गुपरत -श्रन्दूहत
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दतिया भी वहिर्गामी हैं। शुद्ध, रए, रमे, गंध, शरण थादि
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जगें। वह दर फे हिस्से को दय सं करके २ छोड़ेगा |
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+-पमपिवप धष्पगयणण्
भरं किंवानि व्यतृरत् रस्म तसाद, परं पश्यति नामरमे ।
किप् पीए्यमायानमपीन् पय परपुरशत्वमि्त् ।
-कृटोपतिष्टु |
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