स्वर्ग का विमान | Swarg Ka Viman

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : स्वर्ग का विमान  - Swarg Ka Viman
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अमृतलाल सुन्दर जी - Amritalal Sundar Ji

Add Infomation AboutAmritalal Sundar Ji

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
दिपयानुक्रांणिका ।४.५4दिपय, पृष्ठा,१०९ विना टामके घोडेपर बंठाहुआ छडका गे गिर- यया वेसेही हमभी जो अपने मनपर्‌ विश्वासकी लगाम न लगायेंगे तो नरकहीम गिरेंगे. -« ~११० है तो असंभव तवभी शायद चमचेसे समुद्र खाली करदिया जा सके, परंतु मनुष्यसे प्रशुका पार कभीनहीं पाया जासकता इ गः এ#१११ संसारकी हलकीसे हलकी वस्तुकाही हमकी पूरा र ज्ञान नहीं हौसकता, तव इश्वरका पूरा ९ ज्ञान क्योंकर होसकताहै. ~~ ^११२ जो यहां ऊँचे हांगे वे इखरके आगे नीचे गिरमे- जोयहां नपैगा वह ईश्रके वहां मान पावेगा ~११२ परमेश्वरने हमारे मौतके बारंटपर ओर्‌ हमको नर- कमं डालनेके फेसलेपर अभी दस्तखत नहीं किये- इतनेहीम हमकी पाप छोड देना चाहिये. ~“११४ भक्तोंका आनंद उनके हृदयहीम भरा रहता है, उस आनंदका इंढनेके लिये उन्हें वाहर नहीं जाना पडता«११५ अधिकार विना अच्छी वस्तुएँभी पसंद नदी आती इसमे इश्वरीय आनद ठेनेकी योग्यता प्राप्त करों «««१९६ एक धमेके उपदेश करनेवालेने कहा कि प्रश्ुके नामका वर तौ देखो कि मुश्नजैसा पापीभी भक्तिमान्‌€का, होकर शुरू बन सकता है 1 ००० ००७ ३१७ ट्रेन छूटजानेवाद र्टेशनपर्‌ रोना किस कामका मरेकं पी रोनाभी निष्फर्टी हे कि र१२११२३ १२४ १२६ १२७१२९.१३११३३२१८ शत्य क्या हे साधु कते दं कि, सत्यु ईश्वरक कया ६. १३५.2१५० भक्तिका मार्ग खरद्रा हे सी वाचां अरकं पडनेकं लिये नहीं है परंतु जल्दी पहुँचनेके लिये है ने१३६




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now