धनाश्ररीनियमरत्नाकर | Dhanabhari Niyamratnakar
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
46
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)| ४ चनाच्तरौनियमरलाकर ।
लते हैं और उन्हों का प्रचार विशेष है। किसी
| किसी अपर कवि ने भी तेंतीस वर्ण के कवित्त
| बनाये हैं परन्तु बहुतही कम--
| जसवन्तसिंह का बनाया हुआ तेंतीस
अच्तर का कवित्त |
|. প্দিত্্ী ল্দলজাই पिकं चातक पुकार बन
। मोरनि गुहार उदः जुगुन् चमक चमकि । घोर
घनकारे भारे धुरवा धुरारे धाम धमनि मच |
| नाच टामिनौ दमकि दमकि ॥ भकनि वथार
वहे लूकनि लगावै चंग हूकनि भभूकनि कौ उर
| मै खमकि खमकि ! कैसे करि राखीं प्रान प्यारे
| जसयन्त विना नान्हौ नन्ही वृद भरे मेघवा भ-
| सकि ममकि॥
| इकातीस अच्षरवाला कवित्त सनहरन और |
| बत्तीस वाला रूप घनाक्षरी कहलाता है । घ- |
| नच्तरौ न्ट मं लघु गुरु का किसी विशेष क्रम
| से पड़ने का नियम नहँ ह, इसी कारण से ये |
| सुक्तक तथा अनियत कहे जाते हें ॥
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