महान् पाश्चात्य शिक्षा-शास्त्री | Mahan Pashchatya Shiksha-Shastri

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Mahan Pashchatya Shiksha-Shastri by एस. के. पाल - S. K. Pal
लेखक :
पुस्तक का साइज़ :
27 MB
कुल पृष्ठ :
191
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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মক +अध्याय १ ] ; महान्‌ पाश्चात्य शिष्षा-शास्तौप्लेटो के शिक्षा-सम्बन्धी सिद्धान्त उसकी दो प्रसिद्ध पुस्तकों में मिलते, है । वे पुस्तकें “दी रिपब्लिक! (1116 1২677719110) ओर “दी लाज़ (116 1,9५४) কলা हैं। प्लेटो की कृतियाँ वार्तालाप के रूप में ६ | वार्तालाप वास्तव নাড়ি नाटकीय और घटना, व्यंग्य, नया तजीव च रित्र-चित्रण से आतप्रोत हैं। अधिकांश वार्तालाएं में मुख्य अंश सुकरात द्वारा कहलाया गया है जिनमें प्लेटो ने अपने दाशनिक विचारों को प्रकट किया है । “दि रिपन्लिक साहित्य एवं विचार दोनों दृष्टियों से एक महान्‌ पुस्तक है और इसने संसार के अधिकांश दाशंनिकों, राजनीतिशों तथा शिक्षाशात्रियों पर प्रभाव डाला है। रूसो ने ठीक ही कहा है कि दी रिपब्लिकः शिक्षाशात््र का श्रत्युत्तम गवेषणा-मंथ है। “दी लाज़? जिसे प्लेटो ने अपनी बृद्धावस्था में लिखा था, उसकी अत्यन्त इदद्‌ गूढ़ और ध्यावहारिक कृति है। इसमें नीतिशात्र और शिक्षाशासत्त्र दोनों पर उसके श्रत्यन्त परिपक्व विचार संग्रहीत हैं । प्लेटो का दशंन पलयो के शिक्षा-सम्बन्धी विचार उसके दाशंनिक विचारों पर आधारित हैं। उसके शिक्षा-सम्बन्धी विचारों को मली-भाँति तथा अपनी प्राकृतिक श्रवस्था में आर पूर्ण एवम्‌ शुद्ध रूप में ज्ञात करने के लिए. उसके दाशंनिक सिद्धान्तों के विकास का अध्ययन करना आवश्यक है, अन्यथा” हम उसके शिक्षा-सम्बन्धी विचारों के वास्तविक महत्व को न समझ सकेंगे | अ्रतए्व हम प्लेटो के प्रधान दाशं निक संकेतों पर विचार करेंगे । प्लेटों को एक श्रादशवादी दाशनिक की संज्ञा दी गई है क्योंकि उस के विचार से विचारों का जगत ही वास्तविक और सत्य है? | डसके इस विचार-प्रियता . हि के कारण, उसके दर्शन के कुछ विद्यार्थी उसे 'विचारवादो? श्रादशवाद कहना उचित समभते हैं। उसका यह विचार था कि यह भौतिक जगत जिसको हम प्रत्यक्ष शानेन्द्रियों के द्वारा देखते, स्पश करते एवम्‌ श्रनु- मिव करते ह, मिथ्या भ्रम मात्र है। यह सम्पूर्ण प्रत्यक्ष जगत्‌ त्रुटि दोष से पूण वकृतावस्था में है। अतणएव प्लेटो एक एेखे सत्य एवम्‌ महिमामंडित जगत्‌ की कल्पना करता है लिसमें वास्तविक चीज प्राप्त की जा सकती है | इख जगत्‌ को वह “विचारों की दुनि्यौँः कहता है 1 इख जगत्‌ में हम उन समस्त वास्तविक एवम्‌ आदर्श वस्तुओंद्‌ाशंनिक विचारों का महत्त्व। को प्राप्त क़र सकते हैं जिसकी परतिछाया हम प्रत्यक्ष जगत में देखते हैं। ये बस्त॒यें अपने में पूर्ण, अपरिवर्तनशील, चिरंतन एवम्‌ शाश्वत हैं। श्रतणव प्लेटो के विचार€




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