प्राड्मौर्य बिहार | Pradmaurya Bihar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रथम अध्याय भोगोलिक व्यवस्था आधुनिक विदार की कोई प्राकृतिक सीमा नहीं दे। इसको सीमा समयानुप्ार बइलती रही है। प्राचीन कात में इसके अनेक राजनीतिक सेब थे। यथा--ऋदष, संगध, कर बरड, अंग, विदेद, वैशाली और मल्ल । भौगोरिक दृष्टि से इसके तीन भाग स्पष्ट है--उत्तर विदर की निम्न आई भूमि, दक्षिण विद्दार की शुष्क भूमि तथा उससे भी दक्षिग को उपत्यका । इन भूयो ॐ निवापिर्यो की वनाव, भाषा श्रौर प्रकृति में भी भेर है। आधुनिक विहार फे उत्तर मे नेपाल, दच्विण मे उदीषा, पूवं में वंग तया पश्चिम में उत्तरदद्श तथा मध्यप्रदेश हैं । बिहार प्रान्त का नाम पटना जिले के “बिहार! नगर के कारण पड़ा। पाल राजाश्रों के काल में उदन्तपुरी,' जहाँ आजकल बिहारशरीफ है, मगघ की प्रमुव नगरी थी। सुक्रलमान लेखओं ने अ्रद्ृख्य बोद्ध-विदहारों के कारण इस “उदन्‍्तपुरी” को विद्वारं* लिखना आरंभ किया। इस नगर के पतन के बाद सुस्लिम श्ाक्रमणकारि्यो ने पूवं देश के प्रत्येक पराजित नगर को विहार में दही सम्मिलित करना आरंस क्िया। बिहार्‌ प्रान्त का नाम सवपथम “तबाकृत-ए- नातिरी/ * में मिलता है, जो प्राय १३२० वि० स० के लगमग लिखा गया। फालान्तर में मुस्लिम लेबऱों ने इस प्रदेश की उबेरता श्रोर खुवर जलवायु के कारण श्ये निरन्तर वसन्त का प्रदेश सम ककर विद्दार [वद्वार (फारसी)> वन्त] सममा । महाभारतं १, तिव्यती भाषा में श्रोडन्त, झोटन्‍्त झोर उड्डयन्त रूप पाये जाते हैं। चीनी में इसका रूप भोतन्‍्त होता है, जिसका अथं उच्च शिखरवाला नगर होता है। दूसरा रूप है उद्धयडपुरी -जक्षं का दण्ड ( राज दणड ) उठा रहता है अर्थात्‌ राजनरर 1 इस सुझाव के लिए में डा° सुषिमलचन्द सरार का ्रनुगृषटीत है । २. बरत-सूयिष्र श्रत खजान धरायद्‌ ! रस्त-चून-घतप्रस्त सू यि बहार ॥ ( भाठन २९५४) 1 ( भाग्य फिसलते-फिसलते तुरद्ारे देहलो पर आता है जिस प्रकार मृतिंपूजक पारं लाता है। ) वि० सें० १२३४ से उत्पन्त गंजश के-वासी के भाई का लिखा शेर (पथ )। माउनकृत फारस का साहिस्यिक इतिहास, भाग-२, प्ृष्ठ-8७ | ३. मोज्ञाना मिनद्ाज-ए-घिराज का एशिया के 'सुस्लिमरंश का इतिद्ास) िजरी १६४ से ६२९८ हिजरी तक, रेवर्टी का भनुवाद्‌ ए्‌०-९१२० । ४, सद्दासारत २-२१-२




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