कुबेर [सामाजिक उपन्यास] | Kuber [Samajik Upanyas]

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Book Image : कुबेर [सामाजिक उपन्यास] - Kuber [Samajik Upanyas]
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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৫3 युवक चुप था ।मामी ने फद्टा--''पार जाना चाहते हो १उसका झुँ 6 सुज्ञा--' हाँ ।?!नतो धायया (! कहकर सौँझी ने डाँद उठा लिए ।युय गंभीर साय से नाव पर घ़ गया। नाव उलने लगी। संध्या के मुख्पुटे में भी मौसी ने समझे लिया कि युवक श्राव-दैगफता से रधिक खिंतित है ।वं चन रहै चे, ससा मामी ऊषु गुनगुना उठा | जया गाना मी तानते षो १ चुवकने पषा । न्रे अपा 1 ममि ने स्कर उत्तर दिया) युमगुश्खोद्दिपे 1লাঁলী चुप ।युषक भौ चुप ।दाद पल रये + पकएक सर्ति ने -पका-- वर्प सस्पोगे मष ¢पु यत ५३ गाय 3 र#हरापपुर | कया নিরাশ ই ল্য बहुत बड़े सामी | पया उन्हीं ८ पाका 4 বাহে শষ লি আকাম আয ।সহ শীট খাসি १गधरे যা




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