स्वामी विवेकानन्द | Sri Swami Vivekanand

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Sri Swami Vivekanand by नन्दकुमारदेव शर्म्मा - Nandkumardev Sharmma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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५. _ च्खेमेंद रेप शहा | उन दिनों बहुल में ही नहीं सारे भारतवषं मे धमं विप्लव मच रहा थां । बह्गदेशमे ভ্ঞ্লিহল मत की उत्ताल | तरज्ञों को रोकने के लिये बह्मलमाज की नींव पड़ चुकी । थी। रूष्णमोहन बनर्जी, काल्लीच रण बनर्जी, माईकेल मचुसूदन ১ दत्तादि जैसे विद्वान भी प्रभु ईसा मसीह के शरणागत हो खुके थे | कहने को ब्रह्मसमाज करिथ्चियन मत को उत्ताल तरज्खा के रोकने को स्थापित हुआ था; | परन्तु कुछ परिवतन रुप में उत्तक्े द्वारा कृश्चियन मत के लिये नयी सड़क बनने 1111 समाज के प्रवीण नायक, बाबू केशवचन्द्र सेन को वाक्यपछुता - के प्रभाव से हिन्दुओं के धार्मिक विचार ओर विश्वास में परिवर्तन हो गया था| ऐसे कठिन धमं विप्लच के समय में खामी विवेकानन्द मी ब्रह्मसमाज के विचारों की ओर कुक गये थे | परन्तु उनकी ब्रह्मसमाज से कुलु ति नदीं इद । इस बीच में उन्होने करुकन्ता यूनिवसिंरी ( विश्च विद्यालय ) से बी० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण करलो थी । और कानून की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, खाथ ही पने संशया कीं निवृत्ति के लिये कितने ही ब्यक्तियों के पास गये पर कहीं भी द उनकी शङ का समाधान नहीं हुआ | एक दिन उनके पितृव्य 9 { चाचा ) जो राम कृष्ण परमहंस के शिष्य थे | उनको अपने | साथ परमहंसजी फे पास लेगये | पाक, চি ০০০০-24-99 79 লিও {01 831




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