हिंदी वीरकाव्य | Hindi Veerkavya

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Hindi Veerkavya by टीकमसिंह तोमर - Teekamsingh Tomar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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० हिंदी वीरकाब्यं अन्य प्रदेश तथा दक्षिण में एक बार नहीं श्रनेक बार युद्धकरने पड़े । अंत में वह एक ऐसे साम्रा- ज्य की स्थापना करने में सफल हुआ जो उस समय विस्तार; शक्ति एवं वैमव की दृष्टि से संपूण संसार में अनुपम था । अकबर की मृत्यु के उपरांत जहाँगीर सिंदासनारूढ़ हुआ । उसके गद्दी पर बैठने के कुछ समय के उपरांत शाहजादा ,खुसरो ने विद्रोह किया जो पकड़कर बंदीग्रद में डाल दिया गया | अंत में उसकी मृत्यु हो गई । कंधार का घेरा, मेवाड़ के द्वारा अधीनता स्वीकार करना; दक्षिण के युद्ध, तथा काँगड़ा की विजय झादि इसके शासन की प्रमुख घटनाएं हैं । साथ ही जहाँगीर श्रौर नूरजहां का विवाह, शाहजहां तथा महावत खां के विद्रोह भी विशेष उल्लेखनीय हैं, क्योंकि इन घटनाश्ओं का प्रभाव संपूण साम्राज्य पर पड़ा था | जहाँगीर ने भी श्रकबर की नीति का श्रनुकरण करते साम्राज्य के ऐश्वर्य श्रौर वैभव को बढ़ाने की सफल चेषा की थी | अंत में २८ अक्तूबर, १६२७ ई० को उतका देहांत हो गया | जहाँगीर के पश्चात्‌ उसका पुत्र शाहजहां सिंहासनारूढ़ हुआ । इसके शासन-काल में वीर सिंह बुंदेला के पुत्र जुकार सिंह ने दो बार विद्रोह किया । वह श्रंत में मार डाला गया । खां जहां लोदी ने भी सिर उठाया; जिसके फलस्वरूप उसका सिर काट डाला गया । शाइजहां को पुतंगालवासियों से भी कई युद्ध करने पड़े (१९३१-१२ ई० ) । उसे दक्षिण में भी कई लड़ाइयां करनी पड़ीं जिनमें सम्राट के तृतीय पुत्र श्रौरंगज़ेब ने बड़ी वीरता एवं कार्य-पटुता का परिचय दिया | इसके राज्य की श्रन्य उल्लेखनीय घटना कंधार-युद्ध संबंधी है जहाँ इसने तीन बार सेनाएं मेरजी । श्रंतिम तृतीय युद्ध में इसे पराजित होना पड़ा । धन शादजहां के शाहजादों में १६५८ ईं० में उत्तराधिकार-युद्ध हुश्ना जिनमें विजयी होकर रंगज़ेब सिंहासनारूढ़ हुभ्रा । उसने श्रपने निकटवर्ती सभी संबंधियों की हत्या करवा दी श्रौर मयूर सिंदासन तथा ताज के निर्माणुकर्ता झ्रपने पिता शाहजहां को श्रागरे के दुर्ग में बंदी बना. दिया, जहां पर २१ जनवरी, १६६६ ई० को उसका देहावसान दो गया । श्रौरंगज़ेब ने सम्राट बनते ही मुगुल साम्राज्य की श्रकबर के समय से प्रचलित दोनेवाली नीति में एकदम परिवर्तन कर दिया । वह हिंदुश्चों के प्रति कटरता का व्यवद्दार करने लगा |. परिणाम यह डुश्रा कि संपूर्ण देश में क्रांति शरीर विद्रोह की ज्वाला धधकने लगी | हिंदू ; जो _ लगभग एक शताब्दी से मुगल साम्राज्य के स्तंभ थे, शत्रू, बन गए । अतः दक्षिण में मराठा साम्रान्य; राजपूताना में जोधपुर; मेवाड़; मथुरा के श्रास-पार के जाट तथा सतनामी णवं बुंदेल- . खंड में बुंदेला विद्रोद करने लगे | साथ ही सिक्खों ने भी स्वतंत्रता का कंडा फहराना श्रारंभ कर दिया॥। यही नहीं, सुन्नी मुसलमान होने के कारण श्र गज़ेब दक्षिण के शीया राज्यों की स्वतंत्रता का अपहरण करने के लिए तैयार हों गया | श्रौरंगज़ेब का समस्त जीवन उक्त शक्तियों से युद्ध करने में ही व्यतीत हुश्रा । अंत में दद्चि के मराठों से युद्ध करते हुए २० फरवरी, १७०७ ई० को श्रौरंगज़ेब की मृत्यु हो गई। * झऔरंगज़ेब की नीति के कारण मुऱल राज्य की दशा जीर्स-शीर्स हो गई थी | कहीं पर भी .. ! ढा० ईश्वरीप्रसाद : ए शाट ' हिस्ट्री अबू सुस्लिम रूल इन इंडिया; प०. दे१६-६ ४७ केंबिज दिस्ट्री अबू इंडिया, भाग ४, ७०-३३ प्‌




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