मेरा जीवन प्रवाह | Mera Jeevan Pravaah

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Book Image : मेरा जीवन प्रवाह  - Mera Jeevan Pravaah
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हल मेसनकी शान साधवी थीं ।मेरी नामों थी मुझे खूब प्यार करतीं थीं । मेरे खिए ने. जाने कया- गया खाने-पीने की चीज़ें सेंत-संतकर रखती थीं । और गाय- मेंस की ग्वासली (ढोरों की सेवा) चेही करती थीं । बेचारी सबको सुन खेती थीं । सबको राज़ी रखती थीं । पर अधिकतर ल दुखी थ। रहीं । बुढ़ापे के द्विन उनके काफ़ी कलेश में के । 'ंत में अंधी भी हो बाई थीं । में उनकी कुछ भी सेवा न कर सका श्रार्थिक सहायता सी मे पहुँचा सका, दूसका सदा पछुचावा दी रही । माँ इसेशा मेरे साथ तो गहीं, पर उनसी सेरा उतना लगाव नहीं रहा, जिवना कि नानी के साथ 1याह्यकाला में घर की शरीयी जो खली नहीं सका झुख्य कारण नागा शरीर नानी का मेरे उपर अत्यधिक लाइनप्यार ही था 1 बचपन सें सुनहरे पंख क्गाकर उन, मॉपडी में मैंने महल पाया, आगे की कत्पभानभूमि पर एक सुन्दर खुमियाद भी रखी---यद सब इन्हीं दोनों गुरुजनों की सदीखर। नीम नर थे दिन 'ात्साएँ मेरी सुष्छू स्पोकार कर । ः का




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