श्री ललित विस्तरा | Shri Lalit Vistara

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
113 MB
कुल पष्ठ :
472
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand); ललितविस्तरा - विषयसूचि :शपृष्ठ विषय
१ मंगलाचरणङ्कि मन्थ का मोक्षमार्ग से संबंध
२ ललित विस्तरा, जिका, “अनुयोग के प्रकार
द्रव्यानुयोग आदि
ই 'लतित विस्तरा' से प्रतिबुद्ध सिद्धषि गणिका
हृष्टांत
४ ग्रन्थविवरण के ३ साधन# मज़लादि अनुबन्ध
चतुष्टय, चस्तु के दो स्वरूप (१) सामान्य
(२) विशेष
५ 'जिनोत्तम'@& संम्पूणे-आंशिक व्याख्याक्कि गम
ओर पर्यायङ्क अनुवृत्तिपर्याय श्रौर व्याध ज्जिपयाय
६ 'कौन? शब्द के भिन्न भिन्न श्रथं
८ अनुबंध चतुष्टय
६ चैत्यवंदन की निष्फरता-सफलता की चच
११-१२ चैत्यवंदन-सम्यकूकरण के चार हेतु
१३ धर्माधिकारी के ३ लक्तणः (१) अर्थी, (२) समथ
ओर & (२) शास्त्र से अनिषिद्ध
१४ धर्माधिकारी कौन हो सकता है ? धमेका
(२) विधि-तत्परता & (२) उचितव्ृत्ति-तीन
लक्षणों का उपन्यास क्रम
१४ ओऔचित्य, ऐहिक, पारलोकिक
१६ अधिकारी के तीन लक्षणों के बाह्य १४५ चिह्न
१६ धर्मबहुमान के ५ लिग- कलैधमंकथाप्रीति,
क्किघमे-निन्दा-सश्रवण'क्किथमनिन्दकच्नुकंपा,
धर्म में चित्तस्थापन, && उच्च धमनिज्ञासा
१७ विधिपरता के ५ लिग-- रुरु विनय,
@ उचित कालपेशक्षा, @ उचितमुद्रा, @युकत-हके उपयोग१५ उचित वृत्ति के ४ लिग- लोकप्रियता,
अनिन्य क्रिया, संकट में पेये, @्ियथाशक्ति
दान, @लदय का ध्यान१८ अनधिकारी को देने में हानि१९ जिज्ञासा का महपृष्ठ विषय२० अपवाद सच्चा कोन ?२१ ६ कत्तेव्य-- कछ्लिक्षद्ों की प्रवृत्ति की उपेक्षा
@प्रवचन-गां मीर्यगवेषण, @इतरदरेन स्थिति
की जांच, जेन ददोन वैशिष्ट्य निरीन्ञण,
উন হুহাল ঈ इतरसमावेश, @महापुरष-
चरित्रालम्बन२२ जैनदशैन की विशेषताएँ,-किगांभीय,
क्किति विधपरीक्षात्तीणेता,२३ नित्य ही परिवतेनसदिष्ु, विलक्षण नित्या-
नित्यत्व२४ इतरमें कृतनाशादि दोष, @ जेनदशेन में इतर-
समावेश होते हुए भी दोष क्यों नहीं !२६ जेनदशेन का इतर दशेनमें असमावेश
अपुनबंधक जीव के ३ लक्षण
जिनप्रबचनमूल्यांकन हेतुः ३ सिंहनाद सी
शुद्ध देशना२७ बुद्धिभेद, सत्वनाश, दीनता, महामोहवृद्धि,
क्रियात्याग
संसाररसिकों की श्रवणु-अयोग्यता२८ चेत्यवंदन-पुवेविधि२६ अहेद्वंदन पर भावना
'नमोत्थुणं' सुत्र का पाठ३० प्रणिपातदंडक सूत्र का अथे३१ नो सम्पदाएं३२ बस्तु बस्तुत: अनंत धमात्मक है, यह् संपदा
से सिद्ध३३ व्याख्या के ६ लक्षण-(१) संहिता, (२) पद,
(३) पदार्थ, (४) पद्विग्रह, (১) चालना,
(६) प्रत्यवस्थान३४ पूजा क्या है ? अरहंतका अर्थ३४ व्याख्या के सात अंग:-(१) जिज्ञासा
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