कनउजी - लोकगीत | Kanuji Lokgeet

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Kanuji Lokgeet by श्री सन्तराम - Shri Santram

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तृतीय अध्याय > कनउजी-लोकगीतो कै प्रकार ओर उनके वण्य-विषय (६९-१२९) सस्कार-गीतो के प्रकार ६९-१०० सोहर -६९, सोहर का वण्यं-विपय--७१, कामना गीत--७ १, दोहद-गीत--७६ प्रसव-पीडा के गीत--७७ जन्ति के गीत--७८, ननद और श्ागभी के बदने के गीत --७९ नेग के गीत -८०, जच्चा के नखरे के गीत --८२, आनन्द वधाये के गीत --८३, जन्म कै अन्य गीत --८४, मुण्डन के गीत--८५, यज्ञोपवीत के ग(त--८६, नह्‌ के गीत--5९, विवाह के गीत--5९, विवाह गीतो के भेद --९०, गरारी--९३, घोडो--९५, ,्लनरा-९५, नकटा--९६, विदा के गोत--९८, सुहाग-रात् के गीत--९%९ ) ऋत तथा ননযীল १००-१०९ फाग--१००, सावन के गीत- १०२, कजरी-- १०३, बारहमासा--१०३ । व्रतं सम्बन्यी गीत १०९-११३ देवी के गीत-- ११०, शीतलादेवी कं गौत-११०,काम-काज करते समय गाये जाने वाले गीत, चक्को के गोत--११३; रोपा तथा निराई के गीत-- ११५ । खेल के गीत ११७ टेसू के गोत--११७, झुँझिमा के गीत--११८, फुलेरा --११९, लोरी--१२१,




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