हिन्दू पत्नी | Hindu patni

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Hindu patni  by श्री प्रकाश - Sri Prakash
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 2.66 MB
कुल पृष्ठ : 309
श्रेणी :
Edit Categories.


यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटी है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं |

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

श्री प्रकाश - Sri Prakash

श्री प्रकाश - Sri Prakash के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश (देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
हिन्दू पी रद मया को स्याग्य मान रक्‍्या दे उठ समान की र्वियाँ एक बार गैवादिफ लगन का कट अनुभव था लेने पर दुबारा दिवाद करना ही नहीं चाएतीं | बच किसी समाज का लोकमत इस तरद की सुदिधा प्राम काना चाइता है हो मेरे विचार में यद्द उसे निः्सत्देद मिल भी जाती है। पत्र लेखक के पत्र से जद तक मैं समभा रुका हूँ उनवी यह शिकायत हो नहीं कि पत्नी अपनी विपयेच्छा तृप्त नहीं फर सकतीं । शिकायत तो पति की सयंकर श्रौर बेलगाम व्यभिचार की है जा कि मैं पहले कए झुफा हूँ। थो पलट देना ही इसका उपाय है । मारी अनेक और-श्रीर बुराइयों के समान ही बेचसी की भावना भी पक काल्पनिक बुराई दै । दूपित कल्पना के कारण शोक और दुःख फा समान में फैला हुआ दे ददद थोड़े से मौलिक विचार श्र नं दृष्टिकोण के पाते दी नष्ट भ्रष्ट दो जायगा। ऐसे मामलों में मित्रो और रिश्तेदागे को चाहिए कि थे अत्याचार के शिकार को शिकारी के पर से पुड़ाकर ही सन्तोंप न कर बैठें बल्कि ऐसी स्त्री को उस सार्वजनिक सेवा के योग्य बनाने का प्रयत्त करें । इन स्त्रियों के लिए इस तरद भी शिखा पति के शंव्यस्पद सदवास से कहीं श्रधिकर सब और लामप्रद ोगी ।




  • User Reviews

    अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

    अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
    आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :