हिन्दू धर्म प्रवेशिका | Hindu Dharm Praveshika

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Hindu Dharm Praveshika by श्री बैजनाथ केडिया - Shri Baijnath Kedia

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हिन्दूधमंके शास्त्र धू आज तो हिन्दू-धर्मे ध्या है, यह घर्म कहां उत्पन्न हुआ. और कहां कहां फैछा, और वह कितना पुराना दैकत्यादि वा्तोको याद रखोगे तो पर्याप्त होगा। कला-हुमर्‌ । धिदान्त-निणेय | विका=उन्नति । ` , मनद्वारा माहुविनयन् টম. पूर्यह=काफो [.२ 1] हिन्दूधमंके शास्र बालकों ! परमैश्वरकों समता, उसका सजग और उसके इच्छानुसार काम करना; तथा इसे भांति अपने और सबके जीवतका कल्याण करना, इसका ताम धर्म है। इस सस्वा्धमें हिन्दुस्थानमें बहुत प्राचीन कालसे ओो पुश्तके लि गई हैं वे हिन-भरके शाख फदलाति है । भर्थात्‌ জন গুলার আনাই वा ज्ञानके घयन हैं, वे ही 'शाल्र' हैं। स भाक वदे कौन कौन विमा दै अर वे तिदस किस क्रमसे उत्पन्न हुए हैं, इस विषयमें कुछ जानना चाहिये । / जैसे कल हिनदू-धर्मेक्े भूगोलकी आलोचना की गयी थो वैसे ही आज किदृ-धाके इतिदासका दिगदशंव कराया जायगा | श्ख इतिहास इन शार्रोंके तिथि-संवत्‌के कहित प्रश्न देकर मैं हुम्दें हैरान नहीं करू गा । * (१) हिलयू-धर्मके सब शोलोंका मूलअधम शाल




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