नव्या चिकित्सा विजनं भाग-2 | Disease Of The Digestive System Part-2

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : नव्या चिकित्सा विजनं भाग-2 - Disease Of The Digestive System Part-2
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मुकुंदा स्वरुप वर्मा - Mukunda Swaroop Verma

Add Infomation AboutMukunda Swaroop Verma

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
पाचक्‌ तन्त्र के रोग ९मर पतला हौ जाता है ओर अतिसार के समान पतले दस्त हकर मल निकल जाता है। फिर कुछ दिन के ल्यि मल्त्याग रक जाता है और तब फिर पूर्ववत्‌ अतिसार होता है | इस प्रकार' के समय-समय पर आक्रमण होते रहते है। यह दशा जीर्ण बढान्त्र, आन्बमागं (से अवसेध तथा त्रणोलत्ति का सूचक है जिसका पूर्ण अन्वेषण आवश्यक है । । `सामान्यतया कोष्ठबद्धता प्रत्येक ज्वर मे हो जाती है |টা ( 11980 0000 )उदर के ऊपरी भाग मे दोनो ओर की पश्ुंकाओं के बीच के भाग के भीतर दाह या जलन का अनुमव होना हृद-दाह कहा जाता है। बहुत वार मह मे खटा द्रव भर आता है | रात को मसाले, मिर्चा युक्त चट्पटे भोजन से पेट को भर कर सो जाने पर प्राय. ऐसा होता है । इसका कारण आमाशय हृदू-द्वार के समीप के भाग मे अतिअम्लीयता (11 9]०78००109) हो जाना है। ग्रास- नाट के अन्तिम भाग जो आमाशय में खुब्ता है उसके शोथ तथा आक्षेपक से भी ऐसा होता है। प्रयोगों से अम्छ को जछ मे मिछा कर पिछाने से ऐसा नहीं हुआ | इस कारण आसनाल के निचले सिरे का आश्षेपक विशेष कारण प्रतीत होता है| ईंस प्रान्त में एकत्रित आहार का किप्वीकरण भी इसका कारण हो सकता है | ,पेट भरा प्रतीव होनासामान्यतया भोजन करने के पश्चात्‌ ज आहार आमाद्रवय मे पहुंचता है तो आमाशय कुछ विस्तृत हो जाता है। अधिक आहार पहुँचने से और विस्तृत होता है | इससे आमाशय के भीतर का दबाव नहीं बढता। किन्तु दो प्रकार के व्यक्तियों मे आमाशय विस्तार नहीं करता। एक जिनमे मानसिक उद्दिग्नता या चिन्ता बनी रहती है | और दूसरे जिनके आमाञय मे कोई रोग होता है जैसे त्रण या केंसर की उत्पत्ति है। ऐसे व्यक्तियों के थोड़ा सा भी आहार करने के पश्चात्‌ उनको प्रतीत होता है कि उनका पेट भर गया।'इस कारण यदि ऐसा छण मिले तो उका अन्वेषण उचित है |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now