जुदाई की शाम | Judai Ki Sham

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Judai Ki Sham by रामनाथ सुमन - Shree Ramnath 'suman'श्री रविन्द्रनाथ ठाकुर - Shree Ravindranath Thakur

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रवीन्द्रनाथ टैगोर - Ravindranath Tagore

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रामनाथ सुमन - Ramnath Suman

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अस्त्र ला । ` . भन-भन कर मेरे पंजर पर चलाओो। मृत्यु को मृत्यु मारे, अक्षय ये प्राण, कर जाऊंगा इन्हें दान । श्युखलाएं जोड़कर वांबो मुझे खण्ड-खण्ड कर दूंगा एक क्षण में, तेरी हैँ मुक्ति रे मेरी ही मुक्ति में । शास्त्र ला । आओो, मारो मुझे आओझो । पण्डित और पण्डित, ऊंचे स्व॒रों से करते हैं खण्डित द्विव्य वाणी । जानता हूं, तकं-वाण हो जाएंगे वेनिशान मुक्त होंगे जीर्ण वाक्य-प्राच्छन्न लोचनद्वय, देखेंगे ज्योति, दूर होगा तब तिमिर-भय । गत ज्वलित करो अग्नि अब । आज का भला है जो कल भले हो कालिमामय भले वह भस्म हो विश्वमय भस्म हो । दूर करो शोक हो, मेरी अग्नि-परीक्षा में धन्य हो विश्वलोक अपूव दीक्षा में । १६ कः ৮: কপার. ৮.২. -০- *শঙ্ক




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