जैन भजन संग्रह | Jain Bhajan Sangrah

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Book Image : जैन भजन संग्रह  - Jain Bhajan Sangrah
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १३ .)६ छव दण्डक किण मं पावे ? वसकाय में লদ- सक मे पावे-१; १७, १८, १९, २०; २१।७ सात दण्डक किंग सै' पावे १ कोरा अचक्त दशन में पावे-१२९, १३, १४, १५, १६, १७; १८ । |८ आट दण्डक किण मेँ प्रावे १ कोरा चसन्नौ मे पावे-१२. १३, १४, १५, १६, १७, १८, १९ ।€ नव दर्डक किंग से' पावे ? तिथेच में पावे- १२६२० तांड।१० दश दश्डक किण मे' पावे ? प्रसन्नौ में पावे- १२ ै,२१ ताद।११ दग्यारह दण्डक किण मे पवि ? नपुसकं बेद में पावे ( १३ देवता का ठला ) ।१९ बारह दण्डक कियण मे দান? गभं बिना. सन्नो कष्ण लेश्या में पावे-१ से ११ तांडे, १ बाईससों ।१३ तेरह दण्डक किंण में पावे ? सर्व देवता में पावे-२ से ११ तांई, २२, २३, २४,१४ चवदह दण्डक किण में ঘানি? জীহা, অলী से पावे- १३ देवतां रा, १ नारकौ रो।१५ पन्द्रह दर्डका .किण सें. पावे.? स्त्रोवेद में




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