हिन्दी गद्य पद्य संग्रह | Hindi Gadya Padya Sangrah

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
814.84 MB
कुल पष्ठ :
266
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हू 5...)
उदय नहीं हुश्रा । श्र जिस श्रगले श्राथे में प्रकाश है, मघुर श्रोर
शीतल चांदनी दै, उसे हम नये साल में लेकर श्रागे. बढ़ते हैँ । श्ाज्
प्रतिपदा दै । श्राज चन्द्रमा की एक भी किरण हमें नहीं मिलेगी ।
फिर भी झाज ही हम यद वर्षोत्सव मनाने चले दें । हम जानते हैं,
इस श्न्वेरे के आझागे दी प्रकाश प्रकट हो पढ़ेगा । इसी श्रद्धा को
लेकर हमने इस मधु-मास का खण्डी-करण किया हैं। श्राज का
दिन श्रस्खण्द को, श्रनन्त को, शथ्परिमित को मुट्ठी में लेकर देखने
का है । श्रपने को तटस्थ करके काल से श्वाज हमें यह कहना द्द
ढद्दरो, रुको तो ! इथेली पर उठा कर श्राज हम तुम्हारी तौल
करना चाहते हें ।
--श्री सियाराम शरण गुप्त
( “भूढठ सच' से )
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