ज्योतिष सर्व संग्रह | Jyotish Sarva Sangrah

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5.22 MB
कुल पष्ठ :
174
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)है १ प्र० भाकतरापादे मंद । उत्तराणां इस्तचित्राडड'
हा केकन्या । चित्राड * स्ातिविशाख पादत्रयंतुल ।
विशाखा पांदमेकं अनुराधा ज्येष्ठान्ते वृश्चिक ।
मूल च पूर्वापाट उत्तरापादे धन । उत्तराणों त्रयः
पादा: श्रवणधनिष्ठाद्ध मकर । धनिष्ठाद् शत-
भिषा पुर्व शाद्रपदपादब्रय कुम्स ॥
पादमेकं उत्तरा शाद्रपद रेवती सीन ॥दीका-अधिनी के ४ चरण मरणी के ४ चरण छृतिक्रा का
१ चरण तक मेपके चन्द्रमा रहेंगे । कृतिकाके ३२ रोहिखी के ४
मररगाशिर के २ चरण तक चप के चन्द्रमा रहेंगे । सगशिर के २
आद्रकि४ पुनर्चसुके तीन चरण तक मिथुन के चंद्रमा रहते हैं ।
युनर्चसुका १ पुप्य के ४ के ४ तक ककके चंद्रमा रहेंगे ।
मघा के ४ पूर्वाफान्युनी के ४ के १ चरण तक
सिंह के चन्द्रमा । उत्तरा फाल्युनी तीन दस्तके४ चित्राकेर तक
क्या के चल्द्रमा । चित्रा २ स्वा० ४ थि० २. तक तुल के
चन्द्रमा । थि० १ अनु० ४ ज्ये० ३ तक इश्चिक के चन्द्रमा ।
मू० ४ पू० पा० ४ उ० पा० १ तक धन के चन्द्रमा । उ०
चा० ३ श्र० ४ घन २ तक मकर के चन्द्रमा ॥ घेन२ शु०
पूर्वा भाद्र० तीन तक कुम्मके चन्द्रमा । पू०मा० १ उ०्भा०४रेचती ४ तक मीनके चन्द्रमा रहेंगे । इस क्रमसे सबके जानलें 1
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कांदे का दे जिस राशि का सय दो उस से सातवीं राशि पर
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