ज्योतिष सर्व संग्रह | Jyotish Sarva Sangrah

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Jyotish Sarva Sangrah by Ramsvrup

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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है १ प्र० भाक तरापादे मंद । उत्तराणां इस्तचित्राडड हा के कन्या । चित्राड स्ातिविशाख पादत्रयंतुल । विशाखा पांदमेकं अनुराधा ज्येष्ठान्ते वृश्चिक । मूल च पूर्वापाट उत्तरापादे धन । उत्तराणों त्रयः पादा श्रवणधनिष्ठाद्ध मकर । धनिष्ठाद् शत- भिषा पुर्व शाद्रपदपादब्रय कुम्स ॥ पादमेकं उत्तरा शाद्रपद रेवती सीन ॥ दीका-अधिनी के ४ चरण मरणी के ४ चरण छृतिक्रा का १ चरण तक मेपके चन्द्रमा रहेंगे । कृतिकाके ३२ रोहिखी के ४ मररगाशिर के २ चरण तक चप के चन्द्रमा रहेंगे । सगशिर के २ आद्रकि४ पुनर्चसुके तीन चरण तक मिथुन के चंद्रमा रहते हैं । युनर्चसुका १ पुप्य के ४ के ४ तक ककके चंद्रमा रहेंगे । मघा के ४ पूर्वाफान्युनी के ४ के १ चरण तक सिंह के चन्द्रमा । उत्तरा फाल्युनी तीन दस्तके४ चित्राकेर तक क्या के चल्द्रमा । चित्रा २ स्वा० ४ थि० २. तक तुल के चन्द्रमा । थि० १ अनु० ४ ज्ये० ३ तक इश्चिक के चन्द्रमा । मू० ४ पू० पा० ४ उ० पा० १ तक धन के चन्द्रमा । उ० चा० ३ श्र० ४ घन २ तक मकर के चन्द्रमा ॥ घेन२ शु० पूर्वा भाद्र० तीन तक कुम्मके चन्द्रमा । पू०मा० १ उ०्भा०४ रेचती ४ तक मीनके चन्द्रमा रहेंगे । इस क्रमसे सबके जानलें 1 जब किसी लड़के का जन्म दो उस चक्त लग्न देखना कि इस वक्त क्‍या लग्न हैं | पहले यों देखे कि इस महीने में कांदे का दे जिस राशि का सय दो उस से सातवीं राशि पर




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