हिन्दू भारत का उत्कर्ष | Hindu Bharat Ka Utkarsh

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Hindu Bharat Ka Utkarsh by Chintamani vinayak vaidh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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है. 2 सौका प्रारंभिक इतिहास । इस महत्वमय नामवी यथाधेता इस सागकों पढ़मेसे सहज ही मकर हो जायगी । राजपूत लोग दस कासके शर्थात्‌ ८०० ईण के आसपास कहांसे सारतीय इतिहासकी रजसूपि पर छागये यह इस देशके पाचीन इति- हासका पक बहुत बड़ा प्रश्न है। इसका उत्तर यह है कि थे सोग वैद्कि शायोंके वंशज थे श्र सुसलमान घर्मने जो मारतपर पहला आक्रमण कर सिंचु देशकों पादाक्रान्त किया उससे जाणूत होकर थे हिंन्दूधघमंकी रक्षा करनेको आगे बढ़े थे। प्रस्तुत उपविभागण इन लोगके राज्य दविन्दुस्थान मरे स्थापित होगये थे। झोर इनकी बहादुरीकी बदौलत इस- लामका मारत-प्रवेश श्र ५०० वर्षो तक रुका रहा । ये राज- पूत राज्य मुख्यतः मेचाड़के युश्टिलोत सांभरके चाहमान श्ौर कनोजको प्रतिह्ार थे। इन लोगोने इस काले बड़ी ही घीरता दिखायी । थे लोग घर्मरत्तणके उत्साहले श्रागो बढ़े थे श्रता इनकी चीतिमसा उच्च प्रकारकी थी श्र शासन- व्यवस्था सी उत्तम थी । इस भाग वर्णित इतिहास हिन्दी पाठकोंके लिये प्रायः डज्ञातसा है बदिक कह सकते हैं कि छंग्रेजी जाननेघातों के सिये भी बहुत कुछ यहीं बात है। कर्नल टाड लिखित राजस्थानका इतिहास प्रसिद्ध श्रंथ है परन्तु उसमें राजपूतो- का शारंसिक इतिहास बहुत ही थोड़ा है श्रौर बह भी बहुत करके दुन्तकथामूलक है। हां सुसलमानी कालसे इघरका जो इतिहास उन्होंने दिया है वह खिलसिलेवार तथा साघार है । राजपूतौका प्रांरमिक इतिहास ठीक श्रकारसे से दे सकनेके लिये कनेल राडकों दोष नहीं दिया जा सकता | कारण यह कि उस समयतक शिलालेख झादि प्राचीन इति-




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