इस जगत की पहेली | The Riddle of This World
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
140
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)महत्तर सत्यउन्होने व्यक्तिगत सूपत्ते विज्ञानमय लोकम पटुचनेकी चेष्टा
की पर उसे उन्होंने नीचे नहीं उतारा न उसे पाथिव चेतन्यका
स्थायी माग दही बनाया। उपनिषदोंमें कुछ ऐसे मन्त्र
हैं जिनमें यह संकेत किया गया है कि इस पाथिव शरीरकों
रखते हुए सूर्य-( विज्ञानके प्रतीक ) मण्डलकों भेदकर जाना
असम्मव है। इस विफलताके कारण ही भारतका आध्या-
त्मिक प्रयात मायावादमें पयंवसित हुआ | हमारा योग
आरोहण और अवतरणकी द्विविध गतिवात्य है; इसमें साधक
चेतन्यके क्रमशः उच्चतर स्तरोपर आरोहण करता टैः
पर साथ ही वह उन लोकोंकी शक्तिको नीचे केवल
मन और प्राणमें ही नहीं, बल्कि अन्तमें शरीरमें मी उतार
लाता है । इन स्तरोंमें सर्वोच्च स्तर विज्ञान है ओर वही इस
योगका लक्ष्य है। उसका जब अवतरण हो सकेगा तभी
पार्थिव चेतन्यका दिव्य रूपान्तर सम्भावित होगा ।
४ मई १९३०--~>69=>--| ই]
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