पञ्चामृत | Panchaamrit
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11 MB
कुल पष्ठ :
223
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)२४प्रथा क्यों है ? पेदना के कारण इस परिवार को जो ख्याति मिली उसी के कारण
एेसा किया जाता होगा । कोकट ग्राम के पास ही पेद्दन्ना के गुरु शठकोपस्वामी रहते थे |
प्राचीन कवियों की वेश परम्परा का निर्णेय करना सरल कारये नहीं है । ये लोग अपना
परिचय अपने काव्य में अंकित नहीं करते थे | पेदन्ना ने अपने को चुकन्नामात्य का
पुत्र बतलाया है ।पेदन्ना के गुरु का नाम शठकोपाचा्य था । पेदन्ना ने इन्हीं से संस्कृत और
तेलुगु का अध्ययन किया | इन दोनों भाषाओं पर आपने शीघ्र ही अधिकार प्राप्त कर
लिया । इनकी आथिक स्थिति अच्छी नहीं थी अतः भरण-पोषण में कठिनाई होती
थी | इस कठिनाई से छुटकारा पाने के लिए, इन्होंने किसी राजा का आश्रय प्राप्त करना
चाहा । ये कृष्णदेवराय के पाणिडित्य से परिचित थे | ऋष्णुदेवराय के दरबार में
संस्कृत, तेलुगु ओर कन्नड़ के अनेक प्रकाएड परिडत रहते थे |कृष्णुदेवराय के यहाँ पद्धति थी कि जब वे स्नानादि से निघ्रत्त हो भगवान क्री
पूजा के लिए जाते तो पुरोहित लोग उनसे भट कर सकते थे । राजा ब्राह्मण का
उचित सत्कार करते श्रौर ब्राह्मण `राजा को श्राशीवाद देते । राजा से मिलने के
इच्छुक कवि और परिडत पुरोहितों के द्वारा राजा से मिलने की अनुमति प्राप्त करते
थे । | राजा की अनुमति मिलने पर वे लोग अपने कवित्व यां पाण्डित्य का प्रदशन
करते थे । पेद्दन्ना ने इस पद्धति को नहीं अपनाया ओर वे सीवे महामन्त्री श्री सालू
निम्मरुसू के पास गए । वहाँ इन्होंने अपनी कर्विता सुनाई। जिससे महामन्त्री प्रसन्न हो
गए । पेद्दन्ना ने महामन्त्री से कृष्ण देवराय से मिलन की इच्छा प्रकट की । महामन्त्री
अवसर की प्रतीक्षा करने लगे | एक दिन राजा ने महामन्त्री तिम्मस्सू से इच्छा व्यक्त
की कि उनके अभियान के वृत्तान्त की इतिहास का रूप दिया जाए | इस काय के
लिए महामन्त्री ने पेहन्ना का नाम लिया । कष्णदेवराय ने पेहन्ना को अपना दरबारी
बनाया ।पेहन्ना राजा को तत्काल कविता बना कर सुनाते | इनके आशुकवित्व और
पाण्डित्य के कारण राजा शीघ्र ही इन पर कृपालु हो गए । दोनों मित्र की तरह काल-
यापन करने लगे । पेदृन्ना कवि ही नहीं थे किन्तु तलवार चलाने म॑ भी दक्ष थे |
इसलिए राजा के ये विशेष कृपा-पात्र बन सके । एक दिन राजा के बुलावे पर पेद्दन्ना
राजा के साथ शिकार खेलने गए । जड्जल में मूसलाधार-पानी बरसने लगा। दोनों
निकट के गांव में गए. | राजा एक किसान के घर में ठहरे ओर पेहन्ना एक ब्राह्मण
के घर में चले गए | प्रातः काल होते ही सेना राजा को खोजती हुई आई | राजा
सना के साथ विजयनगर पहुँचे । दूसरे दिन पेद्न्ना से राजा ने पूछा--'रात कैसे कठी ?”
पेहन्ना ने उस घर की दरिद्रता का वर्णन किया जिसमें वह रात में ठहरा था। राजा
की इस बात पर बहुत दुःख हुआ कि पेद्दन्ना को कष्ट के साथ रात त्रितानी पड़ी | इस
प्रकार की अनेक कथाएँ प्रचलित हैं जो राजा और कवि की घनिष्टता को प्रकट करती हैं ।
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