विक्रम कीर्ति मंदिर स्मारिका | Vikram Keerti Mandir Smarika
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
218
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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घारोत्सारित कण्टकाखिलदिश कीर्त्यावलक्षीकृता ।
स्वप्ने जागरितेऽपि सन्ततमरित्रातंस्तथान्तवंहि-
भव्यां तमतावलम्बिभिरिव व्यालोक्रि यस्याकृतिः । १ ॥यद्राज्ये वसुघासुधान्यहरिता विद्यापिका ब्राह्मणाः
सजन्था चहुजन्य घन्यविजयोद् मासि प्रतापोजिता ।
घाणिज्यादि समरृदराष्टरविभवा वैश्याश्च वित्ताधिकाः
शूद्रा शित्पकलाकलापकलिता लोकस्य सेवा व्यधु. ।॥ २॥कोति. सहारिभिरगाद्धरिदन्तराणि,
शरी. स्वीकृता कविकुरुविवुवैश्च यस्य ।
चामाहता बुघजनेरपियस्थ नित्य,
भरस्य केवलमनन्यपरायणामूत् ॥ ३ 1
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