देवकी का बेटा | Devkii Ka Beta

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Devkii Ka Beta by रांगेय राघव - Rangeya Raghav

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कह = = আপিল তি भाति रकम ৬ বাটাজ্হা আউট পরা আন পতি রী सीओ मी ५ ता, जी तुभे देखना चाहती हैं | फिर मुझ में ही বন্যা হী 8? कृष्ण ने कहा : यही तो में भी डर रहा हैँ । क्यों! अद्रवाहा ने कहा । चित्रगंधा ने देखा । ष्ण कह उठा : 'तुम्हीं तो कद्दती थीं कि श्रातर सुमुख वृद्ध हो गये हैँ | वे भी कभी अ्रपना सम्मोहन डालते थे | तुम्हारा संग हुआ, वृद्ध हो गये। कहीं मेंने तुम्दारा संग कर लिया ओर मैं भी दृद्ध हो गया तो ! चित्रगंधा ठठा कर हँसी । भद्रवाहा भेंपी। उसने चित्रगंधा का कान पकड़ कर कहा : द्वीठ ! चित्रगंघा ने कहा : ले भाभी ! तूने ही तो पहले छेढ़ा था। श्रय कथो नहीं बोलती । पतू चुप रह !! भद्रवाह्ाय ने कह्दा-- कुछ जानती भी है !! বন্যা हुआ !? चित्रगंधा ने पूछा । श्वर-घर गोकुल में बात है |? भद्रवाहा ने कहा--'हर एक गोप चाहता है कि उसकी बेटी कृष्ण को ब्याही जाये ।! चित्रगंधा के मुख पर व्यया भलकी | बोली नहीं । सोचने लगी | उसकी लंबी श्राँखों में मयमादा कलकी | मद्रवाष्ठा ने कहा : कधा) पुष्प का तो ग्रधिकार है | चाहे जितनी शिरया रखे । यहीं श्राय ॒वुदेव की तेग्ह पलियां हैं । तेरा यह है न आगे जाकर देखियो | कहीं इसको धनमान मिल गया, बढ़ा आदमी हो गया तो फिर न जाने क्या करेगा !? धम्रामी ।? चित्रगंधा ने कहा : तेरा सुमुख तो तुझे देखकर निहाल होता है। वह दूसरी क्यों नहीं करता !” “कर ले तो क्‍या कुछ दोष है !” भद्रवाहाने का । कृष्ण गंभीर हो गया था | वह कुछ सोच रद्दा था। दीप जलने लगे थे | भद्रबाहा ने कहा : क्‍यों भ्या सोच रहा है! “कुछ नहीं ।? कृष्ण ने चौंक कर कहा | चित्रगंधा ने हाथ फैला कर श्रजीब तरह से नीच का होंठ निकाला और बोली : भाभी ! अच्छा रहता है श्रोर फिर जाने क्‍या हो जाता हैं इसे । कुछ




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