केशवी जातक | Kasavi Jatak

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Kasavi Jatak by जगदीश प्रसाद - Jagdish Prasad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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। श्रीः ४ केशवीजांतकम्‌ । भाषोदाहरणसहितम्‌ ।সিসিক শে स्पष्टाघ्याय १. अथ मट्टलाचरणम 1 नत्वा विध्पशारदाच्युतशिवत्रह्मार्क सुस्यग्रहान्‌ कुर्वे जातकपद्धति स्फुटतरं ज्योतिविदा प्रीतये ॥ यंत्रः स्पएतरो5च जन्मसमयो पेद्योडच खेदाः स्फुटा यत्पक्षे हि घटन्त उद्ठम इहास्तक्षे सपड़ः हु च ॥ १ ॥ दैरम्बोऽम्बाय पेधोहपिपद्युपतयो भास्कराय ग्रहा ये पेते लोकपाटा अय द्दा गदिता दिक्पा ये महान्तः ॥ मेषाद्या राद्ययश्चाश्वियुखपुखवरा याश्च नक्षत्रतारा योगा विष्कम्भकायाः सफलमुखराः पांतु मामत्र कृत्पे ॥ १ ॥ সুমি ধহাব नत्वा केशवीनातकं स्फुटम्‌ ॥ जगदाशः प्रकुरुत जगदीशानुफम्पया शाउफम्पया ॥र॥ ˆ अन्वयः~अहं केशाचा्ः नातकषदतिं कुदे करोमीत्पर्थ: । कि रूखा विप्रपशारदास्य॒तशिवनरहयाकेसु्पग्रहा्नवा।किंरिरिष्ं जातक्पदतिं, स्फुट - तरामू, अतिशयेन स्फुटेति स्फुटवरा तां स्फुटतरामू । किमथैमू { ज्योतिरपि भरीतपे ज्योतिषं विशन्ति जानन्ति येते ज्पोतिर्विदस्तषां प्रीतये । भवर ज्योति श्शब्धेन भिस्कन्पी ज्ेयः, गणितसंहिताजातकरुपमित्पर्थ:। होराविदामित्पर्थे ये ज्योपिरविःसते पएतदयोराशासविदो भवत्येवेति शम्‌ । सग्धरात्रचम्‌ ॥ १ ॥ भाषा-गणपति, सरस्वती, विष्ण, शिय, बन्चा और सूयोदि नब- ग्रह॒ इनको नमस्कार फरके उपोतिधिदके संतोपा्थं यह सट जातक- पद्धति नामक थय फले ह 1 इसमे जन्मङाटघरी, शीङ, चक्त, फलक इत्पादि यंत्रोसे सूक्ष्म रीविस লালা জী হয়ই সিম पक्षके प्रत्यक्ष होयउप्र पक्षके महलाघवरीत्या लेना। जन्मकालीन लग्म सवदेशीय उदपसे बनाता.অনন্বৃজৌ ख्य भवे उम ६ राशि नोड देना पो सपममाद होता र॑ `




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