जातक - कालीन भारतीय संस्कृति | Jatak Kalin Bhartiya Sanskriti

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7.29 MB
कुल पष्ठ :
508
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(११ )
प्राप्ति बतछाइ गई है । केन-सम्फ्रदाय ने ब्यपानी सोरगों के दीवन और संस्झति पर
क्ठिना प्रमाव डात्य है, यश स्विभुत है |
झॉस्ट-म्पा में ब्यत्क-कपाबिफ्यक बास्स्प सोड़ा-गहुत हैं। सपासार्य हिस
डसियस के दो प्रन्प इ.. विद्धिप इष्टिगा ठब्य बुद्धि गय-स्टोरीस' लो टस बिपय
के सन्वेफग के खिए मोठिक गिने जाते है । रिचिद पक मददोदस ने सन् १९२ हु
में 'द सोशक भार्गिनिदेशन इन नार्थ-इप्ट इष्टिया नाम का प्रन्य छिला है जिसमे
स्पमाजिक य्यगस्पा के सम्ब थे मे अप्हा सशोभन किया गया हैं । आत्थान बेजीप्रसादली
ने सपने 'दु इप्टेड इन पन्सियंप्ट दष्डिया प्रम्ब में राजनेतिक प्रप्ना पर प्रकाश
डार्य हैं । भीयुत थी सी सेन का रटडीश इन ज्यठक' प्रन्य कलकत्ता -महाबियाण्य्य ने
प्रसिद्ध किया है । भीयुत गोइुर्दास द॑ मास ने सन् १९११६ में 'द सिग्नि
फिकैन्स भाव द ज्यतकार' नाम की टेसमाब्म प्रस्थि रे | भीरतिव्यक मेदठा ने
फलुद्धिप इष्टिया नाम का भपना प्रम्प सन १९३९ इ में प्रकाशिस किया जो
बत्मन्त उफ्य है । मरदुप, सॉची समराषती भचन्ता, एकोरा भौर भाप की करा
कृति के बारे मे गठ दस-बीस बपं में नेक प्रम्थ छे इं, जिनमें लाठक-कथाओं
के जिया और दिए के सम्बस्थ में प्रभूत चचा की गइ है |
रागसमापा में इस बिफ्य पर एक मी प्रम्थ नदीं था | भीजियोगीजी ने
भषिरत परिममपूवक पना प्रस्थ छिजिकर यह बुटि दूर कर दी है । दिन्दी-बास्क
इसपर उनके सदा शामारी रोगे। मेरी स्थार्यी भफेसा मद हैं कि प्राघीन थासक-
प्रत्य और तर प्राचीन बोद्ध सर बेन भारूय का मंथन वियोगीमी शऔर मी करेंगे
तथा दिन्दी बाघों को एक से लघिक ठोकोफ्मोगी प्रस्थों का उपायन दंगे--सिशेफ्ता
प्राछन गढ्मर्मों के बारे से ।
बिदाररपमापा-परिपद् ने दिन्दी-बाल्यम का मदन बाय पिया द। पद
प्रलयाषना हिसने में भपनी चावम्पफ्रयबरा हुए बिठम्ष के लिए से भीपिगागीजी
रुप परिपद् शप्बाढूक छिवपृल्न शद्दायरणी से समापार्थी हूं ।
पद्ना बिजपाइशमी 1
थि से रे १५: बअम्द *८८ थीभर पाएुदय सादोनी
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